23 वर्ष की उम्र में सेना में लेफ्टिनेंट बने विकास, कोईलवर पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत; पटना से ही की पढ़ाई

23 वर्षीय विकास कुमार ने दृढ़ संकल्प और मेहनत से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है. सैनिक स्कूल से प्रेरणा लेकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया. घर वापसी पर उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ.

Lieutenant Vikas Kumar: मन में कुछ कर गुजरने की प्रबल इच्छा और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प के साथ की गयी मेहनत से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है. इस बात को सच कर दिखाया है कोईलवर निवासी विकास कुमार ने. महज 23 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित होकर विकास ने अपने परिवार के साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है.

मंगलवार को सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित होने के बाद पहली बार अपने घर लेफ्टिनेंट विकास कुमार कोईलवर पहुंचे विकास कुमार का परिजनों और ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया. लोगों ने पुष्पवर्षा कर और आरती उतारकर उनका अभिनंदन किया. विकास के घर पहुंचते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल बन गया. लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

ननिहाल में बीता बचपन, सैनिक स्कूल से मिली प्रेरणा

लेफ्टिनेंट विकास कुमार का पैतृक गांव अगिआंव प्रखंड का चवरियां है. हालांकि, उनका बचपन कोईलवर के वार्ड संख्या आठ स्थित ननिहाल में बीता. मामा और कोईलवर नगर पंचायत के पूर्व मुख्य पार्षद विनोद कुमार तथा मामी रेखा देवी की देखरेख में विकास ने प्रारंभिक शिक्षा हासिल की.

उन्होंने कोईलवर स्थित आरपीपीएस विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. इसी स्कूल में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2013 में उनका चयन तमिलनाडु के अमरावती नगर स्थित सैनिक स्कूल में हुआ. वहां उन्होंने वर्ष 2020 तक शिक्षा प्राप्त की.

कोईलवर पहुंचने पर लेफ्टिनेंट विकास का भव्य स्वागत किया गया

पटना विश्वविद्यालय से की स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई

सैनिक स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास ने पटना विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वर्ष 2023 से 2025 के बीच इसी विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

विकास अपनी माता उमा देवी और किसान पिता गुप्तेश्वर सिंह के दो पुत्रों में बड़े हैं. साधारण किसान परिवार से आने वाले विकास की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ ग्रामीणों में भी खासा उत्साह है.

सैनिक स्कूल में सेना में जाने का बनाया लक्ष्य

विकास ने बताया कि सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सेना के अधिकारियों को करीब से देखने और उनके अनुशासन से प्रभावित होने का मौका मिला. इसी दौरान उनके मन में सेना में अधिकारी बनने की इच्छा जगी. इसके बाद उन्होंने सेना में अधिकारी बनना अपना लक्ष्य तय कर लिया और लगातार तैयारी में जुटे रहे.

इसी क्रम में वर्ष 2025 में दूसरे प्रयास में उनका चयन भारतीय थल सेना के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से हो गया. परीक्षा में सफलता के बाद सितंबर 2025 में वह ओटीए चेन्नई में प्रशिक्षण के लिए गये. वहां करीब 11 महीने तक कठिन सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 5 सितंबर को उनका थल सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयन हुआ.

कोईलवर पहुंचने पर लेफ्टिनेंट विकास का भव्य स्वागत किया गया

सफलता का श्रेय मामा-मामी को दिया

विकास ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा और कोईलवर नगर पंचायत के पूर्व मुख्य पार्षद विनोद कुमार तथा मामी रेखा देवी को दिया. उन्होंने कहा कि उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ है. पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं. ऐसे में परिवार के सहयोग, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन ने उन्हें लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन चार से छह घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करते थे. उनके अनुसार, सफलता के लिए केवल घंटों पढ़ना ही जरूरी नहीं है, बल्कि लक्ष्य के प्रति निरंतरता, अनुशासन और सही दिशा में मेहनत अधिक महत्वपूर्ण है.

युवाओं को दिया निरंतर मेहनत का संदेश

विकास ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक युवा को अपना लक्ष्य पहले से निर्धारित करना चाहिए. लक्ष्य हासिल करने के लिए स्व-अनुशासन के साथ लगातार मेहनत जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने का जुनून हो, तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं. निरंतर प्रयास और सही दिशा में मेहनत से सफलता अवश्य हासिल की जा सकती है.

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By दीपक कुमार गुप्ता

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