अररिया. अगर कोई साधक रामाश्रम सत्संग के बताए अनुसार ध्यान साधना की क्रिया को मात्र 08 दिन सुबह शाम नियम पूर्वक करते हैं तो निश्चित रूप से साधना करने वाले साधक को अपने आप अविस्मरणीय सुखद बदलवा का अनुभव स्वतः हो जाता है. यह बातें शनिवार को स्थानीय ओम नगर स्थित प्राइम हॉल विवाह भवन के प्रांगण में रामाश्रम सत्संग मथुरा उपकेंद्र अररिया के तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय आध्यात्मिक आंतरिक साधना शिविर के प्रथम सीटिंग पर अलीगढ़ से पधारे आचार्य देवेंद्र गौर ने उपस्थित साधकों व श्रद्धालुओं से कही. उन्होंने कहा कि हमारे रामाश्रम सत्संग में बताई गयी साधना की पूजा पद्धति, जिसे हमलोग आंतरिक साधना भी कह सकते हैं, लगातार 15 मिनट सुबह व शाम निश्चित समय पर निश्चित आसन के साथ करने पर सत्संग प्रेमियों को पता चल जायेगा कि मैं क्या कर रहा हूं, मेरे जीवन में कितना बदलाव आ रहा है, मेरे ऊपर भगवत कृपा हो रही है, ऐसा अनुभव निश्चित रूप से होता है. पटना से अमरेन्द्र प्रसाद सिन्हा ने कहा कि हमारे गुरु महाराज समर्थ गुरु परमसंत ब्रह्मलीन डॉ चतुर्भुज सहाय जी ने जो रामाश्रम सत्संग की स्थापना की है, इनके द्वारा जो पूजा साधना पद्धति बतायी गयी है उसे दूसरे शब्दों में पूजा साधना पद्धति को उपासना का साधन भी कह सकते हैं. वहीं आचार्य देवेंद्र गौर, अमरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, डॉ ज्योति प्रसाद व ओम नारायण शर्मा व आचार्य विनोद प्रसाद ने भी अपने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि समर्थ गुरु के द्वारा प्रदत्त रामाश्रम सत्संग बहुत ही सरल व्यावहारिक सत्संग है. आचार्यगण के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया. मौके पर उदन कमती, राजेन्द्र प्रसाद साह उर्फ राजू बाबू, प्रेमनाथ प्रसाद, ओम प्रकाश नारायण साह, मनोज प्रसाद कर्ण, पवन कुमार, विकास प्रकाश, विनीत प्रकाश, विवेक प्रकाश, शंकर श्रीवास्तव, शंभू साह, सूर्य नारायण उर्फ भोलू, कारे लाल मंडल सहित अन्य लोग मौजूद थे.
रामाश्रम सत्संग से मिलेगी आंतरिक शांति
रामाश्रम सत्संग बहुत ही सरल व व्यावहारिक सत्संग है
