युद्ध, भूख व साम्राज्यवाद के खिलाफ जन जागरण शक्ति संगठन ने भरी हुंकार अररिया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन द्वारा औरत आजादी मार्च का आयोजन किया गया. अररिया बस स्टैंड से चांदनी चौक तक निकाले गए इस मार्च में दर्जनों ग्रामीण महिलाओं, मजदूरों व युवाओं ने हिस्सा लिया. यह मार्च न केवल महिलाओं के अधिकारों के लिए था. बल्कि दुनिया भर में जारी युद्ध, बढ़ती बेरोजगारी व साम्राज्यवादी हमलों के खिलाफ एक पुरजोर विरोध प्रदर्शन भी था. चांदनी चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए संगठन की सचिव सोहिनी ने कहा कि आज का दिन बाजार की चमक-धमक का नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क की उन कपड़ा मिल मजदूरों व रूस की उन क्रांतिकारी महिलाओं की याद का दिन है. जिन्होंने रोटी व शांति के लिए तानाशाहों को उखाड़ फेंका था. आज जब अमेरिका व इजरायल अपनी दबदबा के लिए फिलिस्तीन में नरसंहार कर रहे हैं व ईरान-वेनेजुएला की आजादी को कुचल रहे हैं. तब भारत की महिलाओं का चुप रहना मुमकिन नहीं है. हमारी सरकार अमेरिका की चाटुकारिता छोड़ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति वापस लाये, वरना युद्ध की आग हमारे घरों तक पहुंच जायेगी. संगठन की वरिष्ठ सदस्य मांडवी देवी ने जोर देते हुए कहा कि युद्ध में हमेशा महिलाओं के शरीर को रणभूमि बनाया जाता है. अमेरिका व इजरायल का यह दावा कि वे महिलाओं को आजाद करने के लिए जंग लड़ रहे हैं. यह एक बड़ा फरेब है. जो मुल्क फिलिस्तीन की माताओं की गोद सूनी कर रहा हो, वह महिलाओं का हमदर्द कभी नहीं हो सकता. हमें बंदूक नहीं, बल्कि सम्मानजनक रोटी, कपड़ा व मकान चाहिये. कार्यक्रम की शुरुआत जीवनशाला के बच्चों अतीश, नंदिनी, अंशु व ज्ञांशा द्वारा गाये गये बेहद मार्मिक युद्ध विरोधी गीत से हुई. जिसने वहां मौजूद जनसमूह को भावुक कर दिया. एकजुटता जताते हुए एडवोकेट नवाज व सव्यसाची सेन ने भी मार्च को संबोधित किया व कहा कि महिलाओं की आजादी के बिना एक न्यायपूर्ण समाज की कल्पना असंभव है. इस आयोजन को सफल बनाने में ज्योति, लक्ष्मी, रघुनंदन, पवन, मधु, दीपक, त्रिभुवन, शहजाद, आनंद, प्रियंका, नीतीश व गोपाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
हम एक ऐसी दुनिया बनायेंगे, जहां बारूद की गंध नहीं, अमन की खुशबू हो...
महिलाओं की आजादी के बिना न्यायपूर्ण समाज की कल्पना असंभव
