अररिया: वाइब्रेंट विलेज योजना से संवरेगा सीमावर्ती गांवों का भूगोल, सुंदरी मंदिर के पास अगरबत्ती यूनिट और पिपरा-कुशमाहा में हाट का खाका तैयार

अररिया जिले के सीमावर्ती गांवों को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत नया रूप दिया जाएगा. पोखरों को ईको-टूरिज्म केंद्र में बदला जाएगा, साथ ही मखाना, मछली पालन और बांस हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा. यह योजना स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करेगी.

भारत-नेपाल सीमा से सटे सीमांचल के अररिया जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Program) के तहत चयनित गांवों के सर्वांगीण कायाकल्प की मुकम्मल रूपरेखा तैयार कर ली गई है. समाहरणालय में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन सीमावर्ती गांवों के विकास को स्थानीय संसाधनों, कृषि क्षमताओं और रोजगार सृजन के केंद्र में रखकर आगे बढ़ाया जाएगा. बैठक में गांवों के पोखरों को बहुउद्देशीय ईको-टूरिज्म केंद्र में तब्दील करने, मखाना-मत्स्य उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, बांस हस्तशिल्प को बढ़ावा देने तथा पिपरा-कुशमाहा में नया ग्रामीण हाट विकसित करने पर सहमति बनी. जिलाधिकारी ने अधिकारियों को तत्काल उपयुक्त भूमि चिह्नित कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.

पोखरों का बहुउद्देशीय कायाकल्प: ईको-टूरिज्म और फ्लोटिंग सोलर

पारंपरिक जलस्रोतों को अब आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा:

  • मखाना और मछली पालन: चयनित गांवों के पोखरों को केवल जल संचयन तक सीमित न रखकर उनमें उच्च गुणवत्ता वाले मखाना उत्पादन और व्यावसायिक मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • ईको-टूरिज्म व सोलर एनर्जी: तालाबों के तटबंधों पर सोलर लाइट, वॉकवे और फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन इकाइयां (Tourist Spots) विकसित करने की तकनीकी संभावनाओं पर काम शुरू किया गया है.

रोजगार और आजीविका: बांस शिल्प से लेकर मंदिर आधारित उद्योग

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़ने का प्लान तैयार किया गया है:

  • सिलाई व बांस हस्तशिल्प: स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई मशीन संचालन तथा उत्तर बिहार के पारंपरिक बांस उद्योग (Bamboo Crafts) के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे.
  • सुंदरी मंदिर क्लस्टर: सुंदरी स्थित ऐतिहासिक मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं के प्रवाह को देखते हुए प्रसाद निर्माण, अगरबत्ती उद्योग और पूजा में उपयोग किए गए बेकार फूलों से रीसाइक्लिंग व प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने की योजना है.
  • सैनिटरी पैड व गोबर गैस प्लांट: महिला स्वच्छता के लिए सैनिटरी पैड निर्माण इकाई और गांवों में स्वच्छ ऊर्जा के लिए गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्रों की तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट मांगी गई है.

वाइब्रेंट विलेज विकास योजना: प्रमुख प्रस्तावित परियोजनाएं

क्षेत्र / पंचायत (Location)प्रस्तावित विकास कार्य (Proposed Development Projects)
पिपरा – कुशमाहाआधुनिक ग्रामीण हाट (बाजार) का निर्माण एवं कनेक्टिंग रोड पर पुल निर्माण
लैलोखरप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC / HWC) की स्थापना
सुंदरीमंदिर आधारित अगरबत्ती, प्रसाद एवं फ्लावर प्रोसेसिंग यूनिट; आम मेला आयोजन
चयनित गांवभवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन व स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
ग्रामीण क्लस्टरबायोगैस प्लांट एवं सैनिटरी पैड उत्पादन इकाइयों की तकनीकी जांच

जमीन चिह्नित कर त्वरित DPR तैयार करने के आदेश

बैठक में जिलाधिकारी ने विकास कार्यों में गति लाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की:

  • अंचलाधिकारी करेंगे भूमि चिह्नित: जिला योजना पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित प्रखंडों के अंचलाधिकारियों (CO) के साथ समन्वय स्थापित कर सभी स्वीकृत और प्रस्तावित योजनाओं के लिए सरकारी भूमि का चयन जल्द पूरा करें.
  • प्रशासनिक अमला रहा मौजूद: बैठक में उप विकास आयुक्त (DDC), जिला पंचायती राज पदाधिकारी (DPRO) तथा जिला योजना पदाधिकारी समाहरणालय में उपस्थित रहे, जबकि संबंधित प्रखंडों के बीडीओ (BDO), पीओ (PO) और बीपीआरओ (BPRO) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Pankaj jha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >