एसडीजेएम कोर्ट ने सुनाया फैसला, 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला, गवाहों के बयान से आरोप साबित अररिया. न्यायमंडल अररिया के एसडीजेएम पार्थ की अदालत ने 21 वर्ष पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में सरकारी शिक्षक योगेंद्र चौधरी को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने आरोपित पर कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी राजेश कुमार राम ने बताया कि यह फैसला अररिया आरएस थाना कांड संख्या 183/2005 व जीआर मुकदमा संख्या 769/2005 में सुनाया गया है. आरोपित योगेंद्र चौधरी, जिला के पैकटोला स्थित आजम नगर निवासी हैं व सरकारी शिक्षक हैं. मामले की सूचिका रामपरी देवी भी सरकारी शिक्षिका हैं. अभियोजन के अनुसार, गिदरिया बैद्यनाथपुर निवासी सुलोचन पासवान की पुत्री रामपरी देवी की शादी वर्ष 1989 में हिंदू रीति-रिवाज से योगेंद्र चौधरी के साथ हुई थी. दंपती को दो पुत्री व एक पुत्र हैं. आरोप है कि वर्ष 1997 से 10 मई 2005 तक योगेंद्र चौधरी अपनी पत्नी को सरकारी वेतन व अन्य आय अपने कब्जे में लेने के लिए लगातार प्रताड़ित करते रहे. इस दौरान उनके साथ मारपीट की गयी, जेवरात छीन लिये गये व उन्हें घर से निकाल दिया गया. जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रहते आरोपित ने दूसरी शादी कर ली थी. मामले को लेकर रामपरी देवी ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया था. इसके बाद न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों ने आरोपों का समर्थन किया. साक्ष्यों व गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने योगेंद्र चौधरी को दोषी पाया. अदालत ने भादवि की धारा 498ए के तहत दो वर्ष कारावास व नौ हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 323 के तहत छह माह कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी है.
21 वर्ष पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में सरकारी शिक्षक पति को दो वर्ष की सजा
न्यायमंडल अररिया के एसडीजेएम पार्थ की अदालत ने 21 वर्ष पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में सरकारी शिक्षक योगेंद्र चौधरी को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनायी है.
