भारत-नेपाल सीमा पर SSB का बड़ा कल्याणकारी कदम, 174 पशुओं की हुई मुफ्त जांच, 33 पशुपालकों को मिली दवा

सीमावर्ती अररिया में SSB ने ग्रामीणों के कल्याण के लिए निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर लगाया। 174 पशुओं की जांच और मुफ्त दवाएं बांटी गईं, जिससे 33 पशुपालकों को बड़ी राहत मिली। यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए आर्थिक रूप से बहुत मददगार साबित हुई।

अररिया, नरपतगंज. भारत-नेपाल सीमा से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल, SSB की ओर से मंगलवार को ग्रामीणों के कल्याण के उद्देश्य से निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया. 56वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, बथनाहा के द्वितीय कमान अधिकारी नितिन कुमार गुप्ता के दिशा-निर्देशन में सीमा चौकी एच समवाय घुरना के कार्यक्षेत्र अंतर्गत जीवंत गांव डुमरबना में आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में सीमावर्ती पशुपालक पहुंचे. शिविर में कुल 33 पशुपालकों के 174 पशुओं की जांच की गई और जरूरत के अनुसार मुफ्त दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं.

सीमावर्ती गांव में लगा पशु चिकित्सा शिविर, सुबह से जुटने लगे पशुपालक

डुमरबना गांव में आयोजित शिविर को लेकर स्थानीय पशुपालकों में काफी उत्साह देखा गया. सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर शिविर में पहुंचे और चिकित्सकीय जांच कराई.

क्षेत्रक मुख्यालय पूर्णिया के द्वितीय कमान अधिकारी, पशु चिकित्सा, डॉ घनश्याम पटेल ने पशुओं की स्वास्थ्य जांच की. जांच के दौरान पशुओं की स्थिति का आकलन करने के साथ पशुपालकों को बीमारी और उसके बचाव से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी गई.

जांच के बाद मुफ्त दवाओं का किया गया वितरण

पशुओं की स्वास्थ्य जांच के बाद चिकित्सक ने पशुओं की स्थिति के अनुसार पशुपालकों को आवश्यक उपचार और देखभाल संबंधी परामर्श दिया. इसके बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप 56वीं वाहिनी बथनाहा की पशु चिकित्सा शाखा के कर्मियों ने स्थानीय पशुपालकों के बीच आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया.

इससे सीमावर्ती क्षेत्र के उन पशुपालकों को विशेष राहत मिली, जिन्हें पशुओं के इलाज के लिए दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों या निजी चिकित्सकों पर खर्च करना पड़ता है.

33 पशुपालकों के 174 पशुओं को मिला चिकित्सा लाभ

आयोजित पशु चिकित्सा शिविर में कुल 33 सीमावर्ती पशुपालकों के 174 पशुओं की स्वास्थ्य जांच की गई. पशुओं की जांच के साथ उनके खान-पान, साफ-सफाई और नियमित देखभाल को लेकर भी पशुपालकों को आवश्यक सुझाव दिए गए.

एसएसबी की इस पहल से सीमावर्ती ग्रामीणों को अपने पशुओं की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उपचार में मदद मिली. स्थानीय लोगों ने शिविर को ग्रामीणों के लिए उपयोगी पहल बताया.

ग्रामीणों ने कहा, ऐसे शिविर से आर्थिक बोझ भी होता है कम

ग्रामीणों ने एसएसबी की ओर से समय-समय पर आयोजित किए जा रहे कल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना की. पशुपालकों का कहना था कि सीमावर्ती गांवों में पशुपालन कई परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन है. ऐसे में पशुओं की बीमारी का इलाज कराने में होने वाला खर्च गरीब परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालता है. निःशुल्क जांच और दवा मिलने से पशुपालकों को आर्थिक राहत मिली है. ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस तरह के शिविर आयोजित करने की मांग की.

पशुओं की नियमित देखभाल की दी गई सलाह

शिविर के दौरान एसएसबी अधिकारियों ने पशुपालकों से पशुओं की नियमित देखभाल करने की अपील की. अधिकारियों ने कहा कि पशुओं में किसी भी तरह की बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए. पशुपालकों को पशुओं की साफ-सफाई, खान-पान और स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान देने की सलाह दी गई, ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके.

एसएसबी जवानों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी

शिविर के दौरान 56वीं वाहिनी एसएसबी घुरना बीओपी के प्रभारी सहायक सेनानायक आशीष कुमार गुप्ता सहित 13 अन्य एसएसबी कर्मी और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे. सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह के कल्याणकारी कार्यक्रमों के आयोजन से एसएसबी और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय और विश्वास का माहौल भी मजबूत हो रहा है. पशु चिकित्सा शिविर के जरिए एसएसबी ने सुरक्षा के साथ ग्रामीण कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की.


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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार यादव

संजीव कुमार यादव प्रिंट माध्यम में 16 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. नरपतगंज (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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