अररिया जिले के रानीगंज थाना परिसर और समीपवर्ती रानीगंज वृक्ष वाटिका में इन दिनों कुदरत का अद्भुत और विहंगम नजारा देखने को मिल रहा है. इंसानों के लिए एक देश से दूसरे देश जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा जैसे कई कागजातों की जरूरत होती है, लेकिन प्रकृति ने परिंदों को सीमा-रहित आजादी दी है. पिछले कई दशकों की तरह इस वर्ष भी साइबेरिया, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी रानीगंज पहुंचे हैं.
थाना परिसर के ऊंचे पेड़ों पर बनाया आशियाना
साइबेरिया और अन्य एशियाई देशों से उड़कर आए ये मेहमान पक्षी रानीगंज थाना परिसर और रानीगंज वृक्ष वाटिका के विशालकाय पेड़ों पर अपना अस्थायी आशियाना बनाते हैं. इन पक्षियों के आगमन से न केवल विशाल वृक्षों की शोभा बढ़ गई है, बल्कि उनकी मधुर चहचहाहट से पूरा थाना परिसर और आसपास का माहौल दिनभर गुंजायमान रहता है. स्थानीय लोग और फरियादी भी इन दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी से सुखद अनुभव करते हैं.
नवंबर-दिसंबर में तापमान गिरते ही लौटते हैं स्वदेश
यह सिलसिला पिछले कई दशकों से अनवरत चला आ रहा है. पक्षी मार्च और अप्रैल के महीने में यहां प्रजनन और प्रवास के लिए पहुंचते हैं. इसके बाद जैसे ही नवंबर और दिसंबर के महीनों में ठंड बढ़ती है और तापमान में गिरावट आती है, ये पक्षी पुनः अपने वतन के लिए उड़ान भर लेते हैं. पक्षियों की यह दिनचर्या यह संदेश भी देती है कि इंसानों की तरह परिंदों को भी अपनी जन्मभूमि से गहरा प्रेम होता है.
थानाध्यक्ष बोले: 'थाना परिसर में पूरी तरह सुरक्षित हैं पक्षी'
रानीगंज के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मार्च-अप्रैल में इन प्रवासी पक्षियों का आगमन फिर से हुआ है. थाना परिसर में मौजूदगी के कारण शिकारियों का भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है. पुलिसकर्मियों और स्थानीय निवासियों द्वारा भी इन पक्षियों के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे ये यहां पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं. पक्षियों की यह आजाद उड़ान हमें सिखाती है कि प्रेम, सद्भाव और प्रकृति कभी सीमाओं की मोहताज नहीं होतीं.
