अररिया समाहरणालय में आयोजित उद्योग विभाग की साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना की सुस्त प्रगति पर जिलाधिकारी विनोद दूहन ने गहरी नाराजगी जताई है. उन्होंने जिले की संबंधित बैंक शाखाओं को कड़ा निर्देश जारी करते हुए स्वीकृत पड़े 54 लंबित मामलों में एक सप्ताह के भीतर हर हाल में ऋण का भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया है.
समीक्षा बैठक में उजागर हुआ आंकड़ों का अंतर
जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान पाया कि जिले में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले बैंकों द्वारा भुगतान की रफ्तार काफी धीमी है:
- कुल निर्धारित लक्ष्य: 202 लाभुक
- स्वीकृत आवेदन: 140 लाभुक
- अब तक भुगतान: केवल 86 लाभुक
- लंबित स्वीकृत मामले: 54 लाभुक (जो स्वीकृति मिलने के बाद भी बैंक चक्कर काटने को मजबूर हैं)
'अनावश्यक विलंब से प्रभावित हो रही स्वरोजगार योजना'
डीएम विनोद दूहन ने बैठक में मौजूद बैंक प्रतिनिधियों (Bankers) से लंबित मामलों का स्पष्ट कारण पूछा और सख्त हिदायत दी.
उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों को बैंक स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है, उनका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में किसी भी स्तर पर लालफीताशाही या देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को गति देने का लक्ष्य
जिलाधिकारी ने PMFME योजना के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि:
- इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देना है.
- इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
- स्वीकृत लोन के भुगतान में देरी होने से उद्यमियों का मनोबल गिरता है और योजना की गति प्रभावित होती है.
बैंकों को समन्वय बनाकर काम करने की हिदायत
बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अनिल कुमार, एलडीएम (LDM) इंदु शेखर सहित कई विभागीय अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि मौजूद रहे.
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों व बैंकर्स को आपसी समन्वय बनाकर लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने और भविष्य में भी समय सीमा के अंदर लक्ष्य पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया.
