नरपतगंज में राजमिस्त्रियों को दिया जा रहा भूकंपरोधी भवन निर्माण का विशेष प्रशिक्षण

Narpatganj Mason Training: बिहार के सीमांचल और भूकंपीय जोन-5 के संवेदनशील इलाके अररिया में आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक सराहनीय पहल की गई है. नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय में क्षेत्र के 30 चयनित राजमिस्त्रियों को ‘भूकंपरोधी मकान’ बनाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके.

अररिया के नरपतगंज से संजीव कुमार यादव की रिपोर्ट

Narpatganj Mason Training: अररिया जिला सहित पूरा सीमांचल क्षेत्र भौगोलिक रूप से भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है. इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय परिसर में राजमिस्त्रियों के लिए एक विशेष आवासीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाले मुख्य कारीगरों (राजमिस्त्रियों) को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से लैस करना है, ताकि वे क्षेत्र में सुरक्षित, टिकाऊ और पूरी तरह भूकंपरोधी (Earthquake-Resistant) भवनों का निर्माण कर सकें.

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की ट्रेनिंग; सड़क से लेकर मकान तक की सीख

  • चयनित मिस्त्रियों की भागीदारी: इस विशेष तकनीकी सत्र के लिए नरपतगंज प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से जमीनी स्तर पर सक्रिय और अनुभवी 30 राजमिस्त्रियों का चयन किया गया है, जिन्हें मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
  • मजबूत नींव और बीम का गणित: प्रशिक्षण के दौरान राजमिस्त्रियों को यह सिखाया जा रहा है कि ढलाई और चिनाई के समय छड़ों (लोहे के सरिये) की बाइंडिंग, पिलर-बीम का जुड़ाव और कंक्रीट का सही अनुपात कैसे रखा जाए, ताकि तेज झटके आने पर भी इमारतें ढहने के बजाय लोड को आसानी से सह सकें.
  • विभिन्न सरकारी योजनाओं में उपयोग: राजमिस्त्रियों को न केवल निजी मकानों बल्कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, पंचायत सरकार भवन और जल-जीवन-हरियाली के तहत बनने वाली विभिन्न सरकारी संरचनाओं के सुरक्षित निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण गाइडलाइंस दी जा रही हैं.

इंजीनियर और ट्रेनिंग मैनेजर ने दी जानकारी; किट और सर्टिफिकेट से नवाजे जाएंगे मिस्त्री

सर्टिफिकेट के साथ मिलेंगे जरूरी औजार: प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य प्रशिक्षक इंजीनियर प्रेम कुमार और ट्रेनिंग मैनेजर शुभंकर डे ने संयुक्त रूप से बताया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह रोजगारोन्मुखी और जनसुरक्षा से जुड़ा हुआ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सभी 30 राजमिस्त्रियों को सरकार की ओर से एक आधिकारिक प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट) जारी किया जाएगा. इसके साथ ही, उन्हें फील्ड में आधुनिक काम करने के लिए तकनीकी टूल-किट (जरूरत के सामान और सुरक्षा उपकरण) भी निशुल्क प्रदान किए जाएंगे, जिससे समाज में उनकी व्यावसायिक क्रेडिबिलिटी बढ़ेगी.

ये मुख्य कारीगर रहे प्रशिक्षण में मौजूद:

आपदा सुरक्षा के इस महा-अभियान में प्रखंड के नामचीन राजमिस्त्रियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. प्रशिक्षण स्थल पर मुख्य रूप से रंजीत कुमार सिंह, राजेश सिंह, प्रदीप सिंह, सुरेंद्र सिंह, मिथिलेश दास, पारस कुमार सिंह, जगन्नाथ यादव, अशोक यादव, बबलू सिंह, नागेश्वर यादव, रुपेश यादव, विजय कुमार, प्रकाश कुमार, शंभू दास, प्रकाश यादव, विकास यादव, नागों यादव, भोलू कुमार, अजय कुमार, जसीम आलम और रघुवीर कुमार सहित कई अन्य राजमिस्त्री उपस्थित रहे और तकनीकी बारीकियों को नोट किया.

स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बिना इंजीनियर’ के बनने वाले मकानों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा और आपदा के समय अररिया जिला सुरक्षित बन सकेगा.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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