हल्के विचार ही आनंदमय जीवन का सूत्र : मुनि श्री

मन के भावों की तीव्रता बिगाड़ सकती है गति

फारबिसगंज. आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री प्रशांत कुमार जी व मुनि श्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में शहर के आरबी लेन स्थित तेरापंथ भवन में प्रवचन आयोजित हुआ. मुनि श्री प्रशांत कुमार जी ने कहा कि आगम के तीन सूत्र- वोसिरामि, मिच्छामि दुक्कड़म और हल्के बनने का भाव जीवन में अपनाने चाहिए. अनावश्यक बुरे विचारों का त्याग ही वोसिरामि है. रात्रि में सोने से पूर्व 84 लाख योनि से खमत खामणा कर आत्मशुद्धि करें. यदि किसी का दिल दुखाया हो तो मिच्छामि दुक्कड़म ले लें. बुरे भावों को लेकर बैठने से एक रात्रि सौ रात्रि खराब कर सकती है. उन्होंने कहा कि विचारों से हल्का बनना आनंदमय जीवन का सूत्र है. जैसे डॉक्टर वजन कम रखने की सलाह देते हैं, वैसे ही मन से हल्के रहने पर मानसिक व शारीरिक बीमारियों से निजात मिलती है. अहंकार का त्याग जरूरी है, यह अवनति की ओर ले जाता है. मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने अहिंसा के मार्ग पर चलने व अनावश्यक हिंसा से बचने की प्रेरणा दी. इस मौके पर गुलाबबाग के नव निर्वाचित सभा अध्यक्ष मनोज पुगलिया का स्वागत महेंद्र बैंद, मनोज भंसाली व निर्मल मरोठी ने जैन प्रतीक चिन्ह पहनाकर किया. मनोज पुगलिया टीम सहित पहली बार मुनि श्री के दर्शनार्थ फारबिसगंज पहुंचे. प्रवचन में श्रावक-श्राविकाओं में खासा उत्साह दिखा.

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