अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Fire Safety Audit: बिहार के अररिया जिले में मरीजों, पर्यटकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है. राज्य अग्निशमन मुख्यालय, पटना के विशेष निर्देश पर जिले के तमाम निजी व सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम, होटलों, लॉज, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक व आवासीय प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. इस विशेष अभियान के तहत अग्नि सुरक्षा ऑडिट (Fire Safety Audit), सघन निरीक्षण और मानकों का अनुपालन कराने की चौतरफा कार्रवाई की जा रही है. जिला अग्निशमन पदाधिकारी ने बताया कि अररिया और फारबिसगंज जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में कई होटलों का ऑडिट पूरा कर संचालकों को आवश्यक सुधार के कड़े निर्देश दिए गए हैं.
कमियां दूर न करने वाले अस्पतालों को अंतिम नोटिस; 48 घंटे से 15 दिनों का मिला अल्टीमेटम
अग्निशमन विभाग के अनुसार, जिन अस्पतालों और नर्सिंग होमों का पूर्व में भी ऑडिट किया जा चुका था, लेकिन उन्होंने अब तक अपनी कमियों और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया है, उन्हें विभाग की ओर से ‘अंतिम कारण बताओ नोटिस’ जारी कर दिया गया है. इसके लिए समय-सीमा भी बेहद सख्त तय की गई है:
- अस्पतालों के लिए: पूर्व में चिन्हित खामियों को दूर करने के लिए अस्पतालों को अधिकतम 48 घंटे का आखिरी समय दिया गया है.
- नए संस्थानों के लिए: जिन प्रतिष्ठानों का नया ऑडिट हुआ है, उन्हें कमियों में सुधार के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम मिला है.
- हाई-रिस्क वार्डों पर विशेष नजर: आईसीयू (ICU), ऑपरेशन थियेटर (OT), ऑक्सीजन रिफिलिंग एरिया और वेंटिलेटर सुविधा वाले उच्च जोखिम श्रेणी के अस्पतालों का ऑडिट प्राथमिकता के आधार पर आगामी 7 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
विभागीय अधिकारियों ने साफ किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर मानकों का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम, 2014 और नियमावली 2021 के कड़े प्रावधानों के तहत संस्थान को सील करने और संचालकों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने जैसी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट हुआ अनिवार्य; ओवरलोडिंग पर लगेगी रोक
अस्पतालों में शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने एक और बड़ा सुरक्षा कवच अनिवार्य कर दिया है. अब सभी अस्पतालों और नर्सिंग होमों के लिए किसी सक्षम विद्युत अभियंता (Electrical Engineer) से ‘विद्युत सुरक्षा प्रमाण-पत्र’ प्राप्त करना अनिवार्य होगा. इस सर्टिफिकेट के लिए संस्थान के स्वीकृत और वास्तविक विद्युत भार (लोड), इंटरनल वायरिंग की गुणवत्ता, सेफ्टी डिवाइस (MCB/RCCB), डीजी सेट, मुख्य पैनल और विशेषकर ऑक्सीजन सप्लाई जोन की बारीकी से जांच की जाएगी. जांच के दौरान यदि किसी भी प्रकार की ओवरलोडिंग या घटिया वायरिंग पाई जाती है, तो उसे तत्काल बदलने के निर्देश दिए गए हैं.
“मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि, जरूरत पड़ने पर किया जाएगा शिफ्ट”: जिला अग्निशमन पदाधिकारी
प्रशासन का सख्त रुख: किसी भी आपात स्थिति या बड़ी लापरवाही के सामने आने पर मरीजों की जान को जोखिम में नहीं डाला जाएगा. गंभीर खामी मिलने पर संस्थान पर तुरंत ताला जड़ा जाएगा.
जिला अग्निशमन पदाधिकारी ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि यदि किसी संस्थान में आग से बचाव के न्यूनतम इंतजाम (जैसे फायर एक्स्टिंग्विशर, सैंड बकेट, स्प्रिंकलर या इमरजेंसी एग्जिट) नहीं पाए गए, तो मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, सिविल सर्जन और स्थानीय पुलिस के आपसी समन्वय (कोऑर्डिनेशन) से संबंधित अस्पताल से मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा और उन्हें तुरंत अन्य सुरक्षित सरकारी या निजी चिकित्सालयों में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी पूरी जवाबदेही और खर्च संबंधित डिफाल्टर संस्थान के संचालक का होगा.
