फारबिसगंज (अररिया) से मो. कलीमुद्दीन की रिपोर्ट
Water Crisis: उत्तर बिहार और सीमांचल के इलाकों में मानसून की दस्तक से ठीक पहले मौसम का मिजाज बेहद तल्ख हो गया है. फारबिसगंज शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुधवार को आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती गर्म हवाओं (लू) के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया. जून महीने के पहले हफ्ते में ही पारा 38 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है, जिससे सुबह 10 बजे के बाद ही लोगों का घरों या दुकानों से बाहर निकलना दूभर हो रहा है. धूप की तपिश और भीषण उमस के कारण लोग चेहरों को गमछे, कपड़ों और छातों से ढककर चलने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि दोपहर के वक्त मुख्य बाजार की सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं, वहीं रात के समय भी उमस भरी गर्मी के कारण गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों की रातें करवटें बदलते कट रही हैं. इस भीषण मौसम में सबसे ज्यादा मार बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रही है, जिससे स्थानीय अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.
हलक तर करने के लिए जूस और लस्सी की दुकानों पर उमड़ी भारी भीड़
इस चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच शहर के व्यावसायिक और व्यावहारिक परिदृश्य में आए बदलावों को समझें :
- शीतल पेय की बढ़ी मांग: तपती धूप में बाहर निकलने वाले राहगीरों के हलक सूख रहे हैं. इस वजह से शहर के मुख्य चौराहों और फुटपाथों पर लगी गन्ना जूस, नारियल पानी, सत्तू, मौसमी व अनार के जूस, लस्सी, आइसक्रीम और खरबूजे की दुकानों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.
- छांव की तलाश: बाजार पहुंचे ग्रामीण और मुसाफिर धूप से बचने के लिए बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, पक्के मकानों के छज्जों और सड़कों के किनारे लगे छायादार वृक्षों के नीचे बैठकर गर्मी से राहत पाने की जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं.
जनप्रतिधियों ने खोला मोर्चा: नप प्रशासन सार्वजनिक स्थलों पर लगाए प्याऊ
प्रशासनिक उदासीनता पर आक्रोश: बढ़ते तापमान के बावजूद नगर परिषद (नप) प्रशासन द्वारा अब तक शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर शीतल पेयजल की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में रोष है. युवा समाजसेवी सह व्यवसायी इजहार अंसारी, जदयू नगर अध्यक्ष इमामुल हक, समाजसेवी शाहबाज खान और राजद नगर अध्यक्ष बेलाल अली ने संयुक्त रूप से नप प्रशासन से मांग की है कि व्यस्त बाजारों में खराब पड़े चापाकालों और नलकूपों को तुरंत चालू कराया जाए. इसके साथ ही जदयू प्रदेश सचिव रमेश सिंह ने भी मुख्य मार्गों पर राहगीरों के लिए तत्काल ‘प्याऊ काउंटर’ (मुफ्त पेयजल व्यवस्था) स्थापित करने की पुरजोर वकालत की है.
लायंस क्लब की पहल से अनुमंडल परिसर में राहत, लेकिन अस्पताल का वाटर प्लांट सफेद हाथी
एक तरफ जहां सामाजिक संस्थाएं जनता की प्यास बुझाने के लिए आगे आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की लापरवाही भी उजागर हो रही है:
- लायंस क्लब का सराहनीय प्रयास: अनुमंडल कार्यालय (SDO Office) परिसर में विगत दिनों लायंस क्लब द्वारा लगाया गया वाटर चीलर (Water Chiller) इस तपती गर्मी में आम जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है. बुधवार को कचहरी और अनुमंडल कार्यालय में अपने प्रशासनिक कार्यों से आए सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ इस वाटर चीलर से ठंडा पानी लेकर अपनी प्यास बुझाती दिखी.
- सांसद निधि का वाटर प्लांट कबाड़: इसके विपरीत, अनुमंडलीय अस्पताल (Sub-Divisional Hospital) फारबिसगंज के बाहरी परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए स्थानीय सांसद प्रदीप कुमार सिंह की विकास योजना (MP फंड) के तहत लाखों की लागत से लगाई गई शीतल पेयजल मशीन महीनों से खराब पड़ी है. अस्पताल आने वाले लाचार मरीजों के लिए अब अस्पताल के भीतर लगा महज एक वाटर चीलर ही एकमात्र सहारा बचा हुआ है. मुख्य द्वार के पास लगी इस खराब मशीन को दुरुस्त कराने के प्रति अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है.
खराब चापाकल ठीक हो रहे हैं, जल्द लगेंगे प्याऊ काउंटर: मुख्य पार्षद
इस पूरे पेयजल संकट और जन-आक्रोश के संबंध में जब फारबिसगंज नगर परिषद की मुख्य पार्षद वीणा देवी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र के अधिकांश चापाकल पूरी तरह दुरुस्त हैं. यदि किसी वार्ड या मोहल्ले में चापाकल खराब होने की लिखित या मौखिक शिकायत मिलती है, तो नप का तकनीकी दस्ता उसे 24 घंटे के भीतर ठीक कर रहा है. मुख्य पार्षद ने आश्वस्त किया कि शहर के सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में राहगीरों की सुविधा के लिए नप प्रशासन द्वारा बहुत जल्द शीतल पेयजल के विशेष प्याऊ काउंटर चालू कर दिए जाएंगे, ताकि इस उमस भरी गर्मी में आम जनता को पीने के पानी के लिए भटकना न पड़े.
