अररिया जिले में ग्रामीण आवागमन को सुगम बनाने और सरकारी धन के सदुपयोग को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. पंचवर्षीय अनुरक्षण (5-Year Maintenance Period) के अधीन आने वाले ग्रामीण पथों और पुलों के रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही को जिलाधिकारी विनोद दूहन ने गंभीरता से लिया है. समाहरणालय स्थित आत्मन सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डीएम ने ग्रामीण कार्य विभाग के दोनों प्रमंडलों (अररिया एवं फारबिसगंज) के अभियंताओं को दो-टूक निर्देश दिया कि मेंटेनेंस अवधि के दौरान सड़कों और पुलों को चकाचक रखना संबंधित विभाग व संवेदकों (ठेकेदारों) की अनिवार्य जिम्मेदारी है. यदि जांच में कोई सड़क बदहाल पाई गई, तो संबंधित कार्यपालक अभियंता (EE) से सीधे स्पष्टीकरण पूछा जाएगा.
आत्मन सभागार में दोनों प्रमंडलों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा
बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग के तकनीकी अमले की मौजूदगी में गहन मंथन हुआ:
- उपस्थित तकनीकी अधिकारी: बैठक में ग्रामीण कार्य प्रमंडल अररिया एवं फारबिसगंज के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता (AE) तथा कनीय अभियंता (JE) उपस्थित रहे.
- जमीनी स्थिति का आकलन: डीएम ने प्रमंडलवार उन सभी सड़कों और पुल-पुलियों की सूची की समीक्षा की, जो वर्तमान में 5 वर्षीय अनुरक्षण अनुबंध के दायरे में हैं.
- सीधा जनता से जुड़ाव: डीएम ने रेखांकित किया कि ग्रामीण सड़कों की जर्जर स्थिति का सीधा नकारात्मक असर आम ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों की दैनिक आवाजाही पर पड़ता है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
समीक्षा बैठक के मुख्य निर्देश और प्रशासनिक निर्णय
| समीक्षा बिंदु (Review Focus) | डीएम विनोद दूहन के कड़े निर्देश (Directives) |
| जवाबदेही तय | सड़क असंतोषजनक मिलने पर संबंधित कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण |
| संवेदकों पर नकेल | तय समय पर मरम्मत न करने वाले ठेकेदारों पर पेनाल्टी व एग्रीमेंट रद्दीकरण की कार्रवाई |
| नियमित फील्ड इंस्पेक्शन | सहायक व कनीय अभियंताओं को नियमित रूप से फील्ड में जाकर सड़कों की गुणवत्ता जांचने का आदेश |
| समयबद्धता व गुणवत्ता | पैचवर्क, गड्ढा भराई और पुलों की सुरक्षा रेलिंग की मरम्मत तय मानकों के तहत पूरी हो |
| दायरा | अररिया व फारबिसगंज दोनों कार्य प्रमंडलों के अंतर्गत सभी अनुरक्षणाधीन पथ |
लापरवाह ठेकेदारों पर होगी कानूनी व विभागीय कार्रवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि संवेदक अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते:
- अनुरक्षण नियमों का पालन जरूरी: निर्माण के बाद 5 वर्षों तक सड़क को मोटरेबल और दुरुस्त बनाए रखने की कानूनी बाध्यता संवेदक की होती है. यदि संवेदक निर्धारित अवधि में गड्ढों की भराई या मरम्मत नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
- गुणवत्ता और उपयोगिता बरकरार रहे: डीएम ने अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए कि सड़कों की उपयोगिता और गुणवत्ता हर हाल में बनी रहनी चाहिए, ताकि बरसात या अन्य मौसमों में संपर्क मार्ग बाधित न हों.
