अररिया के सिकटी से संजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट
Bakrid Celebration: अल्लाह के नाम पर अपनी सबसे अजीज और प्यारी वस्तु को कुर्बान करने की ऐतिहासिक परंपरा के रूप में याद किए जाने वाले पवित्र मुकद्दस त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को पूरे सिकटी प्रखंड क्षेत्र में पारंपरिक मजहबी रिवायत और अकीदत के साथ संपन्न हुआ. त्योहार को लेकर अहले सुबह से ही पूरे सीमावर्ती अंचल में भारी चहल-पहल और रौनक देखी गई. नए परिधानों और पारंपरिक टोपियों में सजे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने निर्धारित समय पर प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण व शहरी ईदगाहों का रुख किया, जहां सामूहिक रूप से नमाज मुकम्मल कराई गई. नमाज के बाद गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच जकात एवं फितरे का वितरण कर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की गई.
परिया के सालगोड़ी में जुटी सबसे बड़ी जमात, मौलानाओं ने बताया पर्व का मर्म
सिकटी प्रखंड के अलग-अलग नमाज स्थलों पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी.
- परिया सालगोड़ी ईदगाह: क्षेत्र की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जमात परिया के सालगोड़ी ईदगाह मैदान में देखी गई, जहां एक साथ हजारों की संख्या में नमाजियों ने कतारबद्ध होकर खुदा के सजदे में सिर झुकाया.
- बरदाहा ईदगाह: यहाँ प्रसिद्ध धार्मिक गुरु मौलाना अहमद रजा की इमामियत (नेतृत्व) में बकरीद की विशेष नमाज शांतिपूर्वक संपन्न कराई गई.
इसके अतिरिक्त प्रखंड के दहगामा, कुचहा, खोरागाछ, सैदाबाद, सिकटी मुख्य बाजार, कासत, सोहागमाड़ो, बैरगाछी, भोलानी, बौक और बारुदह के ईदगाहों व जामा मस्जिदों में भी पूरी अकीदत के साथ नमाज अदा की गई.
त्याग का संदेश: इस पावन मौके पर उलेमाओं ने पैगंबर हजरत इब्राहिम के कालजयी सपने और उनके पुत्र हजरत इस्माइल की असीम कुर्बानी के ऐतिहासिक प्रसंग को साझा किया. उन्होंने बताया कि यह पर्व हमें खुदा पर अटूट विश्वास, इंसानियत और समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करने का सर्वोच्च संदेश देता है. नमाज मुकम्मल होने के बाद अकीदतमंदों ने अपने-अपने घरों पर सुन्नत-ए-इब्राहिमी के तहत जानवरों की कुर्बानी दी और तबर्रुक का वितरण किया.
बच्चों की टोलियों से दिखा मेले जैसा नजारा, सुरक्षा में घूमती रही पुलिस
सुबह के समय जब रंग-बिरंगे कपड़ों में सजे बच्चे अपने पिताओं और बड़े-बुजुर्गों के साथ उल्लासपूर्वक ईदगाहों की तरफ बढ़ रहे थे, तो पूरे सिकटी अंचल में एक खूबसूरत उत्सव और मेले जैसा मनमोहक नजारा देखने को मिला. नमाज के बाद युवाओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहा और देर शाम तक आपसी मिलन व दावतों का दौर जारी रहा.
प्रशासनिक मुस्तैदी: सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण विधि-व्यवस्था और कौमी एकता को बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन सुबह से ही पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा. सिकटी थानाध्यक्ष रौशन कुमार सिंह और बरदाहा के अपर थानाध्यक्ष लक्ष्मण पासवान के नेतृत्व में पुलिस के आला अधिकारी भारी सशस्त्र बल (सदलबल) के साथ सभी संवेदनशील चौराहों और मुख्य ईदगाहों के आसपास लगातार गश्ती (पेट्रोलिंग) करते नजर आए. प्रशासन की इसी मुस्तैदी और स्थानीय शांति समिति के सहयोग से पूरा त्योहार शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में संपन्न हुआ.
