अररिया में गरीबों को मुफ्त कानूनी मदद का बड़ा असर, 3 साल में LADC ने 91.7% मामलों का किया निष्पादन

अररिया में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) ने पिछले तीन सालों में 91.7% मामलों का सफल निपटारा कर गरीबों के लिए न्याय की राह आसान की है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान कर यह व्यवस्था एक मिसाल कायम कर रही है.

Araria LADC: अररिया. अदालत की प्रक्रिया लंबी हो और सामने आर्थिक परेशानी हो, तो गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय की राह और मुश्किल हो जाती है. ऐसे लोगों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता कितनी अहम हो सकती है, इसका असर अररिया में लीगल एड डिफेंस काउंसिल यानी LADC के तीन साल के कामकाज में दिखाई देता है.

जिले में 2 नवंबर 2023 को नालसा की योजना के तहत शुरू हुए LADC ने नवंबर 2023 से जुलाई 2026 तक ट्रायल और बेल से जुड़े कुल 928 मामलों में 851 का निष्पादन किया है. यानी करीब 91.7 फीसदी मामलों का निपटारा किया गया. इस अवधि में 77 मामले लंबित रहे.

एलएडीसी की यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो आर्थिक कारणों से निजी वकील की फीस वहन नहीं कर सकते. ऐसे जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके मामलों में पैरवी और जरूरी कानूनी प्रक्रिया में मदद की जाती है.

928 मामलों में 851 का निपटारा, आंकड़ों में दिखा काम का असर

नवंबर 2023 से जुलाई 2026 तक एलएडीसी के पास ट्रायल और बेल से जुड़े 928 मामले पहुंचे. इनमें 851 मामलों का निष्पादन किया गया.

सालवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 36 मामलों में से 28 का निष्पादन हुआ. वर्ष 2024 में 286 मामलों में 226 का निपटारा किया गया. वर्ष 2025 में 409 में से 333 मामलों का निष्पादन हुआ.

वहीं जुलाई 2026 तक 341 मामलों में से 264 मामलों का निष्पादन किया गया. इन आंकड़ों से साफ है कि समय के साथ एलएडीसी के काम का दायरा बढ़ा और बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा भी हुआ.

जमानत के 604 आवेदनों में 431 मंजूर

एलएडीसी का काम सिर्फ मामलों के ट्रायल तक सीमित नहीं रहा. जमानत से जुड़े मामलों में भी इस व्यवस्था ने बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध करायी.

तीन साल की अवधि में जमानत के कुल 604 आवेदन सामने आये. इनमें 431 मामलों में जमानत मंजूर हुई, जबकि 153 आवेदन खारिज हुए. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जमानत मामलों में सफलता का आंकड़ा करीब 71.3 फीसदी रहा.

किसी आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए जमानत की कानूनी प्रक्रिया में मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है. ऐसे मामलों में सही समय पर कानूनी सलाह और पैरवी व्यक्ति तथा उसके परिवार को लंबे समय तक चलने वाली परेशानियों से राहत दिला सकती है.

5598 रिमांड कार्य, जेल में भी पहुंची कानूनी मदद

एलएडीसी की गतिविधियां अदालत परिसर तक सीमित नहीं रहीं. तीन साल में कुल 5598 रिमांड कार्य किए गये. इनमें 43 लोगों को जमानत और 99 लोगों को निजी मुचलके पर रिहा कराया गया.

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू मंडल कारा में की गयी गतिविधियां भी हैं. एलएडीसी की ओर से मंडल कारा में 448 बार जेल विजिट की गयी. इन दौरों के दौरान बंदियों को कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी दी गयी.

जेल में बंद ऐसे लोगों के लिए यह मदद खास महत्व रखती है, जिन्हें अपने मामले की कानूनी स्थिति या उपलब्ध विकल्पों की जानकारी नहीं होती.

297 यूटीपी को मिली जमानत, 40 की हुई रिहाई

एलएडीसी के अनुसार जेल विजिट और कानूनी सहायता के दौरान 297 अंडरट्रायल प्रिजनर्स यानी यूटीपी को जमानत दिलाने में मदद की गयी. इसके अलावा 40 लोगों की रिहाई करायी गयी.

285 मामलों में क्रॉस एग्जामिनेशन भी किया गया. ये आंकड़े बताते हैं कि एलएडीसी की भूमिका सिर्फ कानूनी प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर है.

गरीबों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह व्यवस्था

कानूनी लड़ाई में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक आर्थिक स्थिति होती है. निजी वकील की फीस, अदालत से जुड़े खर्च और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया गरीब परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है.

ऐसे में निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था जरूरतमंद व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए कानूनी रास्ता अपनाने का अवसर देती है. अररिया में एलएडीसी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले करीब तीन वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों ने इस व्यवस्था का लाभ लिया.

खास तौर पर दलित, महादलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह व्यवस्था न्याय तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

विनय कुमार ठाकुर के नेतृत्व में संभाली थी जिम्मेदारी

जिले में नालसा की इस योजना की शुरुआत 2 नवंबर 2023 को हुई थी. एलएडीसी के गठन के बाद चीफ विनय कुमार ठाकुर के नेतृत्व में डिप्टी चीफ सोहनलाल ठाकुर, दुखमोहन यादव तथा सहायक अरुणेश गौरव और सोनी कुमारी ने कार्यभार संभाला.

चीफ विनय कुमार ठाकुर ने बताया कि दलित, महादलित और गरीब लोगों को निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एलएडीसी लगातार काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाना इस व्यवस्था की प्राथमिकता है. तीन वर्षों के दौरान हुए निष्पादन और जेल विजिट के आंकड़े इसी दिशा में किए गये प्रयासों को दर्शाते हैं.

Araria LADC: आगे भी जरूरतमंदों तक पहुंचाने की चुनौती

एलएडीसी के तीन साल के आंकड़े निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि कानूनी सहायता की जानकारी जिले के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे.

कई गरीब और विचाराधीन बंदी ऐसे हो सकते हैं, जिन्हें अपने कानूनी अधिकारों और मुफ्त सहायता की उपलब्धता की जानकारी नहीं होती. ऐसे में जेल विजिट, जागरूकता और समय पर कानूनी सहायता इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को और बढ़ा सकती है.

अररिया में अब तक 851 मामलों का निष्पादन, 431 जमानत और 297 यूटीपी को जमानत दिलाने के आंकड़े बताते हैं कि मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था जरूरतमंदों के लिए न्याय की राह में एक महत्वपूर्ण सहारा बन रही है.

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लेखक के बारे में

By मृगेंद्रमणि सिंह

मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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