बस स्टैंड के पास एबीसी नहर किनारे है शनिदेव का दिव्य धाम, एक ही छत के नीचे शिव परिवार और न्याय के देवता का दुर्लभ संगम

Araria Bus Stand: अररिया जिला मुख्यालय के रानीगंज बस स्टैंड के समीप स्थित शनिदेव मंदिर में शनिवार को आस्था का अनूठा समागम देखने को मिलता है, यहाँ एक ही छत के नीचे कर्मफल दाता शनि महाराज और पूरे शिव परिवार के दर्शन होते हैं, जिससे भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

अररिया से राहुल सिंह की रिपोर्ट

Araria Bus Stand: अररिया जिला मुख्यालय स्थित रानीगंज बस स्टैंड के पास, एबीसी नहर के किनारे स्थापित भगवान शनिदेव का दिव्य धाम स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की गहरी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है, करीब तीन दशक पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ श्रद्धालुओं को न्याय के देवता शनिदेव के साथ-साथ संपूर्ण शिव परिवार का दुर्लभ और कल्याणकारी संगम देखने को मिलता है, शनिवार और मंगलवार को यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए जिले भर से सैकड़ों भक्त पहुँचते हैं.

गिद्ध पर सवार हैं शनिदेव, चार हाथों में सुशोभित हैं अस्त्र-शस्त्र

मंदिर के गर्भगृह की बनावट और मूर्तियां बेहद भव्य और अलौकिक हैं, जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं:

  • तेजस्वी विग्रह: मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शनिदेव अपने पारंपरिक वाहन गिद्ध पर विराजमान हैं, काले रंग की इस विशाल और आकर्षक प्रतिमा में उनके माथे पर सूर्य जैसा तेजस्वी मुकुट सुशोभित है, उनकी आंखों में भक्तों के प्रति करुणा और न्याय का भाव साफ झलकता है.
  • आयुध और मुद्रा: शनि महाराज की इस चतुर्भुज प्रतिमा के हाथों में त्रिशूल, गदा और धनुष-बाण सुशोभित हैं, जबकि उनका एक हाथ भक्तों को अभयदान और आशीर्वाद देने की मुद्रा में है, ऐसी अटूट धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ आकर मत्था टेकता है, उसकी कुंडली में जारी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का कुप्रभाव काफी कम हो जाता है.

दायीं ओर विराजमान है संपूर्ण शिव परिवार, नंदी भी हैं नतमस्तक

अद्भुत संगम: मुख्य प्रतिमा के ठीक दायीं ओर पूरा शिव परिवार अत्यंत सलीके से स्थापित किया गया है, जहाँ भगवान भोलेनाथ अपने हाथ में त्रिशूल और डमरू लिए ध्यान मुद्रा में हैं, उनके साथ लाल वस्त्रों में सजी माता पार्वती और कुमार कार्तिकेय विराजमान हैं, इसके अलावा प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता श्री गणेश और संकटमोचक हनुमान जी की भी दिव्य मूर्तियां भक्तों को सम्मोहित करती हैं, भगवान शिव के वाहन नंदी बाबा भी शिवलिंग के ठीक सामने नतमस्तक मुद्रा में बैठे हैं.

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि करीब 30 वर्ष पहले यहाँ एक अत्यंत छोटा सा पूजा स्थल था, लेकिन जैसे-जैसे लोगों की मन्नतें पूरी होती गईं, भक्तों ने आपस में चंदा और सहयोग कर इसे एक भव्य मंदिर का रूप दे दिया, मुख्य बस स्टैंड के बिल्कुल करीब होने की वजह से अररिया आने-जाने वाले मुसाफिर भी यात्रा शुरू करने से पहले यहाँ रुककर बाबा का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते.

मंदिर कैसे पहुंचे और क्या है पूजा की परंपरा?

यदि आप इस पावन धाम के दर्शन करना चाहते हैं, तो मंदिर पहुँचने का मार्ग बेहद सुगम और सरल है:

  • मार्ग की जानकारी: अररिया जिला मुख्यालय से रानीगंज जाने वाले मुख्य मार्ग पर बस स्टैंड से मात्र 100 मीटर की दूरी पर आगे बढ़ने पर एबीसी नहर के ठीक किनारे यह भव्य मंदिर दिखाई देता है.
  • विशेष पूजन विधि: हर शनिवार को सुबह से ही यहाँ सरसों का तेल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं, सनातन परंपरा के अनुसार शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिए भक्त मुख्य रूप से सरसों का तेल, काला तिल, काला कपड़ा, शमी के पत्ते और नीले रंग के फूल अर्पित कर आरती में शामिल होते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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