अररिया में पुल नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ नदी में उतरे ग्रामीण, 6 फीट आवेदन बहाकर जताया विरोध

Araria Bridge Protest: अररिया में पुल निर्माण की मांग अब आंदोलन का नया रूप ले चुकी है. भलुआ नदी पर पुल नहीं बनने से नाराज ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम 6 फीट लंबा आवेदन नदी में बहाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया.

Araria Bridge Protest: अररिया से राहुल सिंह की रिपोर्ट. अररिया सदर प्रखंड के झमटा और बटुरबाड़ी पंचायत के बीच स्थित भलुआ नदी के नव्वा पाखर घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग करने के बावजूद जब पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में आंदोलन किया. रविवार को सैकड़ों ग्रामीण नदी में उतर गए और मुख्यमंत्री के नाम लिखा 6 फीट लंबा आवेदन भलुआ नदी में बहाकर विरोध दर्ज कराया.

30 मिनट तक नदी में खड़े रहे ग्रामीण

आंदोलन में शामिल ग्रामीण करीब 30 मिनट तक नदी के पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करते रहे. प्रदर्शनकारियों ने “पुल नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए और प्रशासन से जल्द पुल निर्माण शुरू करने की मांग की.

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है. कई गांवों का संपर्क कट जाता है, जिससे छात्रों, मरीजों और किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.

सड़क बनी, लेकिन पुल अधूरा सपना

ग्रामीणों ने बताया कि घाट के दोनों ओर लोक निर्माण विभाग द्वारा अच्छी सड़क बनाई गई है, लेकिन नदी पर पुल नहीं होने के कारण सड़क का फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार अगर पुल बन जाए तो झमटा, बटुरबाड़ी समेत आसपास की करीब 15 पंचायतों के एक लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.

सरकार तक आवेदन नहीं पहुंचता, शायद नदी पहुंचा दे’

इस मौके पर सामाजिक संगठन “अररिया का मुद्दा” के संचालक Faisal Javed Yasin ने कहा कि वर्षों से आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई.

उन्होंने कहा कि शायद सरकारी दफ्तरों तक ग्रामीणों की आवाज नहीं पहुंच रही, इसलिए इस बार आवेदन नदी के जरिए भेजा गया है, ताकि सरकार तक लोगों की पीड़ा पहुंचे.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर जल्द पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर धरना, सड़क जाम और बड़े जनआंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा.

इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता गालिब चुन्ना, शेख इमरान, पूर्व मुखिया सोएब आलम, कामिल अख्तर, नील कमाल और अन्य ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे.

विकास और सुविधा से जुड़ा मुद्दा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पुल की मांग नहीं, बल्कि पूरे इलाके के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन से जुड़ा मुद्दा है. ग्रामीणों को अब प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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