डीएम की अध्यक्षता में प्रेस दिवस पर हुई परिचर्चा
अररिया : जिला जन संपर्क प्रशाखा द्वारा राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर मीडिया कर्मियों ने कहा कि संघर्ष क्षेत्र से रिपोर्टिंग के मामले में मीडिया कर्मियों की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है. हर तरह का दबाव बनाने की कोशिश होती है. तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर मीडिया को परोसने का खतरा रहता है. लिहाजा मीडिया कर्मियों को अधिक सतर्क व जिम्मेदार रहने पर ध्यान देने की जरूरत है. लेकिन ऐसी परिस्थिति में निष्पक्षता से समझौता किसी हाल में भी मुनासिब नहीं कहा जा सकता है. वहीं इस बात पर कमोबेश सभी मीडिया कर्मी एक मत दिखे कि प्रेस की आजादी पर पाबंदी लोकतंत्र के हित में नहीं है.
डीआरडीए सभा भवन में डीएम हिमांशु शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर निर्धारित विषय पर अपने विचार रखते हुए प्रो अशोक झा, जितेंद्र सिंह, आशुतोष कुमार निराला, परवेज आलम, एलपी नायक, अमित कुमार अमन, मुर्शिद रजा व पंकज रंजीत सहित अन्य मीडिया कर्मियों ने कहा कि पत्रकारों का काम हमेशा चुनौतियों से भरा होता है.
इस अवसर पर प्रेस दिवस की शुभ कामनाएं देते हुए डीएम ने कहा कि देश में मीडिया कमोबेश निष्पक्ष हो कर काम कर रही है. यही वजह है कि लोग अब भी प्रेस पर सबसे अधिक भरोसा करते है. उन्होंने भी कहा कि प्रशासनिक तंत्र के काम काज पर मीडिया की निगाह रहनी चाहि. जरूरत हो तो सवाल उठाने का पूरा अधिकार मीडिया को है.
शब्दों के चयन में बरतें एहतियात
डीआरडीए निदेशक शंभु कुमार ने कहा कि शब्दों के चयन में एहतियात बरतना जरूरी है. किसी बलात्कार पीड़िता की खबर में ये जरूरी नहीं है कि उसकी जाति भी लिखी जाये. जबकि अतिथियों का स्वागत करते हुए एडीपीआरओ गुप्तेश्वर कुमार ने देश में प्रेस दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला.
