मुसलिम भाई के तालाब में दिया जाता है भगवान भास्कर को अर्घ

आठ बीघा में बने तालाब के मालिक है मो मारुफ, 70 वर्षों से इसी तालाब में किया जाता है छठ नाग देवता के मंदिर निर्माण के लिए तालाब किनारे दिया है मो मारूफ ने दान दी है जमीन अररिया : लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर हिंदू व मुसलिम के बीच सांप्रदायिक सद्भाव […]

आठ बीघा में बने तालाब के मालिक है मो मारुफ, 70 वर्षों से इसी तालाब में किया जाता है छठ

नाग देवता के मंदिर निर्माण के लिए तालाब किनारे दिया है मो मारूफ ने दान दी है जमीन
अररिया : लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर हिंदू व मुसलिम के बीच सांप्रदायिक सद्भाव देखने को मिलता है. इस पर्व के मौके पर नारियल, गन्ना सहित अन्य फल बेचने वाले दुकानदारों में से अधिकाधिक संख्या मुसलिम भाइयों की होती है. छठ की महिमा को देखते हुए वे भी पूरी तरह पाक साफ रहते हैं.
महापर्व छठ को लेकर मुसलामनों की सहभागिता बार-बार नजर आती रही है. इससे इतर एक मिशाल अररिया आरएस वार्ड संख्या एक निवासी मो मारूफ द्वारा भी लोक आस्था के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनश्चित कर दिखाया जाता है. लगभग 70 वर्षों से अररिया आरएस के वार्ड संख्या दो स्थित अपने तालाब को वह छठ व्रतियों के लिए उपलब्ध कराते हैं. जिसकी साफ-सफाई की जिम्मेवारी भी वे ही उठाते हैं. मो मारूफ की माने तो ऐसा करने में उसे आत्मिक शांति का अनुभव होता है. साथ ही अररिया आरएस में गंगा जमुनी तहजीब का भी उदाहरण पेश होता है.
स्थानीय निवासी सह नप के उप मुख्य पार्षद गौतम साह की माने तो लगभग 70 वर्षों से अररिया आरएस के वार्ड संख्या दो में आठ बीघा में स्थित उक्त तालाब में दो हजार से ज्यादा छठ व्रति भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए जमा होते हैं. इस मौके पर 50 वर्षीय मारूफ तन-मन से छठ व्रतियों को सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने में जी जान से जुटे रहते हैं.
मो मारूफ के सद्भावना की जितनी भी मिशाल दी जाये वह कम होगा. उनके द्वारा नागंपचमी की पूजा के लिए एक डिसमिल जमीन नाग देवता के मंदिर निर्माण के लिए दान में दी गयी है. तालाब के महाड़ पर अवस्थित नाग देवता के मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है. छठ के अवसर पर घाटों की सफाई का काम भी पूरी इमानदारी के साथ वे करते हैं. साथ ही छठ घाट को कोई गंदा नहीं करे इसके लिए वे रतजगा के पहरा भी देते हैं. बदले में छठ व्रतियों द्वारा दिये गये प्रसाद को अपने पूरे परिवार के साथ प्राप्त कर उन्हें सकून मिलता है.

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