अररिया : भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर उनकी प्रतिमा को अंतिम रूप दे दिया गया है. इसको लेकर शहर का माहौल भक्तिपूर्ण हो गया है. देवशिल्पी विश्वकर्मा अपने विशिष्ट ज्ञान व विज्ञान के कारण मानव जाति से लेकर देवों के बीच भी पूजे जाते हैं.
बाबा विश्वकर्मा को वैदिक देवता के रूप में माना जाता है. पंडितों का मानना है कि बाबा विश्वकर्मा सृष्टि के प्रथम निर्माता माने जाते हैं. विष्णु पुराण के प्रथम अंश में विश्वकर्मा को देव-बढ़ई कहा गया है. तथा भगवान के शिल्पावतार की संज्ञा दी गयी है. जबकि शिल्प के ग्रंथों में वह सृष्टिकर्ता भी कहे गये हैं.
भगवान विश्वकर्मा के आविष्कार एवं निर्माण कार्यों को देखा जाए तो इंद्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमंडलपुरी आदि का निर्माण इनके द्वारा ही किया गया है. पुष्पक विमान का निर्माण तथा सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी इनके द्वारा ही बनायी गयी हैं. शहर में कई जगहों भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है, उनमें पूजा के लिए प्रतिमा स्थापित की गयी है.
फैक्टरी, दुकान व शो रूम में पूजा की तैयारी पूरी
इस विश्वकर्मा पूजा का काफी महत्व है. विश्वकर्मा पूजा को लेकर फैक्ट्री, हार्डवेयर की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में विशेष रूप से बाबा विश्वकर्मा की पूजा की तैयारी की गई है. इस मौके पर जगह-जगह पूजन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन रखा गया है. कई लोग अपने-अपने घरों में भी बाबा विश्वकर्मा की तस्वीर की पूजा करते हैं. बस स्टैंड स्थित विश्वकर्मा मंदिर सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों में पूजा की तैयारी पूरी कर ली गयी है.
