बेदी झा, अररिया : राष्ट्रीय स्तर पर फनीश्वरनाथ रेणु के साहित्य के फूल से महक बिखरने वाले जिले में जमींदार प्रथा भी कम प्रभावी नहीं रहा है. यहां पर कई स्टेट के नाम की चर्चा आज भी लोग चटखारे लगाकर करते हैं. इनकी शान-बान आज भी दिखती है. ऐसे में हथियार रखने की परंपरा पुरानी रही है.
हालांकि अररिया पिछड़े जिले में शामिल है. इसका दावा बड़े ही फख्र के साथ माननीय लोग करते हैं कि जिले को उनके प्रयास से पिछड़े जिले में शामिल किया गया है. लेकिन हथियारों के मामले में जिला कहीं से भी पिछड़ा नजर नहीं आता है.
जिले की तस्वीर देश दुनिया में बाढ़ से परेशान हाल किसानों की दिखाई देती है, रोजगार के अभाव में पलायन की
बेबसी दिखाई देती है. जिले में घपले घोटालों की काली तस्वीर दुनिया के सामने है. आज भी अररिया सिकटी एबीएम पथ की बदहाली आइने की तरह साफ झलकती है. उच्च शिक्षण संस्थान नहीं हैं. मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज का सपना आज भी जिलेवासी देख रहे होते हैं. लेकिन इससे इतर, जिले के लोग हथियारों के शौकीन हैं. अमूमन हथियारों की अनुज्ञप्ति ऐसे ही लोग लेते हैं.
जो आर्थिक रूप से संपन्न माने जाते हैं. जिनका बहुत लंबा कारोबार हो. बहुत बड़े व्यवसायी हों या फिर अन्य किसी कारणों से उन्हें हथियारों की जरूरत है. ऐसे ही लोग हथियार लेते हैं. लेकिन पहले हथियार जमींदारों की शान मानी जाती थी. आज भी ऐसे जमींदार मिल जायेंगे जो कि अपने हाथ में दो नाली बंदूक टांग कर चलते हैं.
कभी उनसे गोली चले या न चले लेकिन बंदूकें शादी व समारोह में जरूर गरजती हैं. हालांकि अभी आचार संहिता चल रहा है. लेकिन शौकीनबाज फिर भी अपने शौक से बाज नहीं आते हैं.
दो नाली बंदूक के मामले में अररिया पहले तो दूसरे स्थान पर फारबिसगंज जानकारी के मुताबिक जिले में लगभग पांच दर्जन से अधिक आग्नेयस्त्रों के अनुज्ञप्ति अलग-अलग कारणों से निलंबित की गयी है. दर्जनों लोगों ने अलग-अलग थाने में अपने हथियारों को जमा कर दिया है. चार दर्जन से अधिक हथियारों के मालिक ने भले ही अनुज्ञप्ति कहीं अन्य ली हो लेकिन हथियारों का नवीनीकरण जिला अररिया में ही कराया.
ऐसे लोगों में ज्यादातर नौकरीपेशा लोग शामिल बताये जाते हैं. इनका नाम ओडी पंजी में अंकित किया जाता है. इतना ही नहीं जिले में कई माननीय ने भी हथियारों के लाइसेंस लिए हुए हैं. इसमें राइफल, रिवाल्वर व पिस्टल शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक अगर आंकड़ों पर गौर करें तो सर्वाधिक राइफल का लाइसेंस अररिया थाना क्षेत्र में निर्गत है.
जबकि दूसरे स्थान पर फारबिसगंज थाना क्षेत्र आता है. इसी तरह पिस्टल या रिवाल्वर के मामले में पहले स्थान पर अररिया थाना क्षेत्र का नाम आता है. दोनाली बंदूक के मामले में भी अररिया पहले स्थान पर है. जबकि सिकटी दूसरे स्थान पर और तीसरे स्थान पर फारबिसगंज है.
किसी को बंदूक, तो किसी को पिस्टल पसंद
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जो आंकड़े सामने आये हैं, वे इस प्रकार हैं. नरपतगंज थाना क्षेत्र में दोनाली बंदूक 42, रायफल 06, पिस्टल रिवाल्वर 4 हैं. जबकि जोकीहाट में 45 दो नाली, 08 रायफल, 01 पिस्टल है.
पलासी थाना क्षेत्र में 40 दो नाली, एक इकनाली बंदूक है. रायफल व पिस्तौल, रिवाल्वर की संख्या तीन-तीन है. अररिया थाना क्षेत्र में 82 दो नाली, एक इकनाली, 55 रायफल, 33पिस्टल रिवोल्वर, है.
कुर्साकांटा थाना क्षेत्र में 20 दो नाली बंदूक, तीन रायफल हैं. इसी प्रकार फारबिसगंज थाना क्षेत्र में 40 दो नाली, एक इकनाली बंदूक है. जबकि रायफल की संख्या 42 है. जोगबनी नगर पंचायत क्षेत्र में 17 दो नाली बंदूक है. 06 रायफल व दो पिस्तौल रिवाल्वर के लाइसेंस धारी हैं.
ताराबाड़ी थाना क्षेत्र में 38 दो नाली, एक इकनाली, एक पिस्टल रिवाल्वर के लाइसेंसी हैं. सिमराहा थाना क्षेत्र में 17 दो नाली, एक इकनाली बंदूक हैं. जबकि 02 रायफलधारी भी हैं. इसी तरह रानीगंज थाना क्षेत्र में 22 दो नाली 2 इकनाली 16 राइफल के व रिवाल्वर पिस्टल के 2 लोग शौकीन हैं. बौसी थाना क्षेत्र में 23 दुनाली 02 इकनाली बंदूक के अनुज्ञप्ति धारक हैं.
जबकि एक ने राइफल ले रखा है. सबसे पिछड़े प्रखंड में शुमार सिकटी थाना क्षेत्र में 43 दो नाली बंदूक हैं. एक इकनाली बंदूक है. 08 रायफल के भी लाइसेंस धारक हैं. भरगामा थाना क्षेत्र में 18 दोनाली बंदूक है. एक, एक नाली बंदूक है. 10 रायफल हैं. जबकि तीन पिस्टल रिवाल्वर धारक हैं.
बहरहाल, भले ही जिला पिछड़े जिले की श्रेणी में आता हो. मूलभूत समस्याओं से जूझते इस जिले में हथियारों की अनुज्ञप्ति व संख्या यह बताने को काफी है कि यहां के लोग भी उन्नत जिला की तरह हथियारों के शौकीन हैं.
