अररिया : रविवार की देर शाम आश्रम मोहल्ला स्थित सहारा समिति हॉल में आयोजित समारोह में शहर के मूल निवासी व पूर्णिया जिला स्कूल के सेवानिवृत्त अंग्रेजी शिक्षक रबींद्र नाथ दास द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण हुआ. समारोह की खास बात यह रही है कि श्री दास की पुस्तक के लोकार्पण के लिए उनके दो […]
अररिया : रविवार की देर शाम आश्रम मोहल्ला स्थित सहारा समिति हॉल में आयोजित समारोह में शहर के मूल निवासी व पूर्णिया जिला स्कूल के सेवानिवृत्त अंग्रेजी शिक्षक रबींद्र नाथ दास द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण हुआ. समारोह की खास बात यह रही है कि श्री दास की पुस्तक के लोकार्पण के लिए उनके दो ख्याति प्राप्त शिष्य दिल्ली व असम से विशेष रूप से पहुंचे. समारोह के दौरान गुरूुशिष्य परंपरा निभाने की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली.
पुस्तक ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑन माय बर्थ प्लेस अररिया के लोकार्पण करने वालों में से एक जाने माने स्तंभकार प्रो डा मणींद्र नाथ ठाकुर जेएनयू से आये थे, जबकि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी कुमार विनय सिंहदेव असम से आये थे. वे वहां पुलिस अपर महानिदेशक के पद पर तैनात हैं. दोनों ही अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक के शिष्य रह चुके हैं. इस अवसर पर लेखक श्री दास ने जहां पुस्तक का संक्षिप्त परिचय कराया. वहीं उन्होंने कहा कि वे भले की पूर्णिया में बस गये हों. पर उनकी आत्मा अररिया में रहती है. उन्हें अररिया व जिले की संस्कृति पर गर्व हैं. अपने बचपन व स्कूल के दिनों की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि ये जिला धार्मिक सौहार्द व आपसी प्रेम के लिए सदियों से जाना जाता है. साथ ही अपने दोनों शिष्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे शिष्यों पर गर्व है. वहीं लेखक के दोनों शिष्यों ने न केवल अन्य अतिथियों के साथ पुस्तक का लोकार्पण किया.
इस उपलब्धि पर गुरु को बधाई दी. बल्कि मंच पर ही अपने गुरु का पैर छू कर आशीर्वाद लिया. पुलिस अधिकारी श्री सिंहदेव ने कहा कि उनके शिक्षक श्री दास बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक रहे हैं.
वहीं प्रो मणींद्र नाथ ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद पुस्तक लिखना इस बात का प्रमाण है कि उनके गुरु अपनी दूसरी पारी भी बखूबी खेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि गुरु ने पुस्तक लिखकर यह साफ कर दिया है कि एक शिक्षक समाज को क्या दे सकता है.
इसी क्रम में सीमांचल की साझा संस्कृति की सराहना करते हुए प्रो ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में भारत सहित कई अन्य देशों में एक संस्कृति, एक राष्ट्र की अवधारणा पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे माहौल में सीमांचल के पास देने के लिए बहुत कुछ है. यह बहुत सुखद है कि तरह-तरह की बोलियों, भाषाओं व धर्मों वाले सीमांचल में लोग अमन चैन, सौहार्द व प्रेम से रहते हैं. ऐसी संस्कृति को बचाये रखने की जरूरत है.
मंच पर उपस्थित अतिथियों काली मंदिर के साधक नानू बाबा, पूर्णिया लॉ कॉलेज के संस्थापक ब्रज मोहन ठाकुर, सेवानिवृत्त प्रमंडलीय आयुक्त प्राण मोहन ठाकुर, वरिष्ठ अधिवक्ता विजय झा, जाने माने उद्योगपति कनक सरकार, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक लक्ष्मी नारायण मंडल व मो मोहसिन व पर्यावरणविद सूदन सहाय शामिल थे. मंच संचालन आनंद भारती ने किया. वहीं स्वागत गीत इंद्र नाथ झा व भोले शंकर झा ने प्रस्तुत किया.
समारोह के मौके पर अधिवक्ता देव नारायण सेन, हंसराज प्रसाद के अलावा बीरेंद्र शरण, सत्येंद्र शरण, सैयद शमीम अनवर, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी विजय कुमार सिंह, शैलेंद्र शरण, अजय सेन गुप्ता, रजनीश कुमार रतन कुमार दास, देवव्रत चौधरी, आशीष सिन्हा, गौतम सेन गुप्ता, तपन तालुकदार सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे.