Ara Ballia Four Lane: बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए गुड न्यूज है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने आरा से बैरिया होते हुए बलिया तक बनने वाली नई फोरलेन सड़क के लिए 1564.19 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है.
यह पूरा प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर तैयार होगा. इसका मतलब है कि जो कंपनी टेंडर लेगी, वही डिजाइन से लेकर सड़क बनाने तक का सारा काम करेगी. निर्माण एजेंसी को हर हाल में चार साल के अंदर इस सड़क का काम पूरा करके एनएचएआई को सौंपना होगा. इसके बाद अगले पांच सालों तक सड़क की देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी.
20 अगस्त को खुलेगा टेंडर
एनएचएआई की तरफ से जारी किए गए इस मेगा प्रोजेक्ट के टेंडर को इसी साल 20 अगस्त को खोला जाएगा. वर्तमान में आरा से बलिया के बीच सफर करने वाले लोगों, मुसाफिरों और व्यापारियों को संकरा रास्ता होने के कारण भारी जाम से जूझना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है.
यह नई फोरलेन सड़क बन जाने के बाद दोनों राज्यों के बीच का सफर बेहद तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा. इस आधुनिक हाईवे की सुविधा मिलने से यात्रा का समय आधा रह जाएगा.
गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, पीपा पुल मार्ग से होकर गुजरेगा फोरलेन बाईपास
इस परियोजना के तहत सड़क का निर्माण पीपा पुल मार्ग से होते हुए किया जाएगा. इसके लिए मौजूदा नेशनल हाईवे एनएच-31 और एनएच-922 के बैरिया-आरा वाले हिस्से को एक शानदार चार लेन बाईपास सड़क के रूप में बदला जाएगा.
इस प्रोजेक्ट के अंदर गंगा नदी पर एक नया विशाल पुल और ओवरब्रिज बनाना भी तय हुआ है. यह नया पुल बिहार और यूपी के बीच के जमीनी संपर्क को मजबूत कर देगा.
माल ढुलाई का खर्च होगा कम
इस सड़क के बन जाने से पूर्वी भारत के राज्यों को आपस में जोड़ने वाला एक बेहतरीन रोड नेटवर्क तैयार हो जाएगा. फोरलेन बनने से बड़े और भारी ट्रकों को चलने में आसानी होगी, जिससे सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजने की लागत काफी घट जाएगी.
इसके अलावा फैक्ट्रियों के सामान और किसानों के कृषि उत्पादों को बहुत तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा. इस नई सड़क का सीधा फायदा बिहार के भोजपुर, पटना और यूपी के बलिया समेत आसपास के कई जिलों के लाखों लोगों को मिलेगा.
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कम होंगे रोड एक्सीडेंट
बेहतर और चौड़ी सड़क होने की वजह से इस रूट पर होने वाले सड़क हादसों में काफी कमी आएगी. साथ ही एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी मरीजों को लेकर समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगी. ईपीसी मॉडल के तहत सड़क बनने के बाद भी जनता को कोई परेशानी न हो, इसके लिए ठेकेदार एजेंसी अगले 5 साल तक इसकी टूट-फूट की मरम्मत खुद अपने खर्च पर करेगी.
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