पटना सिटी: नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में छात्रों ने गुरुवार की दोपहर अस्पताल की आउटडोर सेवा को बंद कर दिया. नतीजतन उपचार कराने आये मरीजों को निराश लौटना पड़ा. आउटडोर सेवा बाधित कराने के बाद आक्रोशित छात्र अस्पताल में ही इमरजेंसी गेट के पास धरना पर बैठ गये.
धरना दे रहे छात्र दोषियों पर कार्रवाई करने , किसी भी शैक्षणिक व सरकारी संस्थान में बगैर प्राचार्य और संस्थान हेड के अनुमति के पुलिस के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे. छात्रों ने ऐसा दस दिनों के अंदर नहीं होने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी है.
घूम-घूम कराया आउटडोर बाधित
पुलिस द्वारा छात्रावास में घुस कर छात्रओं के साथ मारपीट करने की घटना से गुस्साये छात्रों ने गुरुवार की सुबह साढ़े 11 बजे के आसपास अस्पताल पहुंच और आउटडोर (ओपीडी) को बंद करना शुरू कर दिया. छात्रों ने इस दौरान सजर्री, मेडिसिन, नेत्र, शिशु रोग विभाग, इएनटी, हड्डी रोग विभाग व महिला प्रसूति विभाग में चल रहे आउटडोर की सेवा बाधित कर दी. इस दौरान विभागाध्यक्षों से भी छात्रों की झड़प भी हुई. हालांकि, छात्रों ने इमरजेंसी व महिला प्रसूति विभाग के कामकाज को बाधित नहीं किया.
डॉक्टर भी वापस लौटे
अस्पताल में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में चलता है. मरीजों की भीड़ अस्पताल में उपचार के लिए जमा थी. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों के पंजीयन का कार्य भी चल रहा था. साढ़े 11 बजे के आसपास आउटडोर सेवा बाधित हुई और मरीज बगैर उपचार कराये वापस लौटने लगे. स्थिति यह थी कि एक बजे तक अधिकतर विभागों से चिकित्सक वापस लौट गये. धरना दे रहे छात्रों को समझाने के लिए प्राचार्या डॉ शिव कुमारी प्रसाद व अधीक्षक संतोष कुमार के साथ विभागाध्यक्ष भी पहुंचे और समझा कर शांत कराया. जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की एनएमसीएच इकाई के अध्यक्ष विजय शंकर प्रसाद ने कहा कि महिला पुलिस के बगैर महिला छात्रावास में पुलिसकर्मी कैसे प्रवेश कर गये इसी मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग व राज्य महिला आयोग के पास भी छात्र जायेंगे. इधर, नालंदा मेडिकल कॉलेज में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस बल को भी तैनात किया गया है.
