बिहटा गोलीकांड: सूरज को गोली किसने मारी

पटना: बिहटा के आनंदपुर में अपहृत मुन्ना उर्फटेनी का शव मिलने के बाद हुए हंगामे में गोली से जख्मी मृतक के चचेरे भाई सूरज के मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस यह नहीं जान पायी कि गोली किसने मारी थी. यह गोली थानेदार के सर्विस रिवॉल्वर से चली थी या फिर किसी दूसरे ने […]

पटना: बिहटा के आनंदपुर में अपहृत मुन्ना उर्फटेनी का शव मिलने के बाद हुए हंगामे में गोली से जख्मी मृतक के चचेरे भाई सूरज के मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस यह नहीं जान पायी कि गोली किसने मारी थी. यह गोली थानेदार के सर्विस रिवॉल्वर से चली थी या फिर किसी दूसरे ने गोली मारी थी, इस सवाल पर पुलिस खामोश है.

घटना होने के बाद सूरज के पिता बुद्धदेव यादव ने यह बयान दिया था कि मेरे बेटे को थानेदार शंभु यादव ने गोली मारी दी. वह गुरुवार तक अपने बयान पर कायम रहे. जख्मी सूरज के भाई सुनील का भी यही बयान था. लेकिन, शुक्रवार को सूरज के सारे परिजन बयान देने से बचते रहे. सुनील ने यहां तक कहा कि सूरज का फर्द बयान ही सही है.

बिहटा थाने में सूरज के बयान के आधार पर ही अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. सूरज ने अपने फर्द बयान में थानेदार द्वारा गोली मारने की बात को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है. उसने देखने के बाद पहचानने की बात कही है. लेकिन, पुलिस ने अब तक सूरज से आरोपित की पहचान कराने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और न ही अपने स्तर से छानबीन कर गोली चलानेवाले को चिह्न्ति करने का ठोस प्रयास किया है. सवाल है कि यदि थानेदार दोषी नहीं, तो पुलिस ने उन्हें क्लीनचिट क्यों नहीं दी और यदि उन पर संदेह है, तो उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया? पुलिस यह भी नहीं बता पा रही है कि घटना के बाद थानेदार के रिवॉल्वर में कितनी गोलियां थीं? दानापुर के डीएसपी राजेश कुमार ने सिर्फ इतना बताया कि सर्विस रिवॉल्वर को जब्त कर लिया गया है और जांच की जा रही है.

नहीं मिला था कारतूस
सूरज को जो गोली लगी है, न तो उसका अंश ही पुलिस को मिला है और न ही खोखा. इसमें पुलिस के साथ ही परिजनों का कहना है कि गोली पेट चीरते हुए निकल गयी. काफी भीड़-भाड़ व हंगामा होने के कारण वह कहां गिरी, यह किसी को पता नहीं है. गोली का अंश या खोखा मिलने पर यह बात तुरंत ही स्पष्ट हो जाती कि थानेदार के रिवॉल्वर से गोली चली है या नहीं?

फर्द बयान को राम कृष्णा नगर थाने ने बिहटा थाना भेजा
गुरुवार को रामकृष्ण नगर पुलिस ने घायल सूरज का बयान दर्ज कराया था. इसके बाद गवाहों के हस्ताक्षर कराने की आदि की प्रक्रिया करने के बाद शुक्रवार को बिहटा थाने में भेज दिया गया. इसके बाद प्राथमिकी की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली. मामला दर्ज होने के बाद केस के अनुसंधानकर्ता पटना सेंट्रल स्कूल के पास स्थित मौर्या हॉस्पिटल में जख्मी सूरज से जानकारी लेने के लिए पहुंचे.

गोली से फटी सूरज की बड़ी व छोटी आंत
बिहटा गोलीकांड में घायल सूरज मौर्य हॉस्पिटल के आइसीयू में भरती है, जहां उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है. हॉस्पिटल के सजर्न डॉ प्रभात रंजन ने बताया कि उसकी बड़ी व छोटी आंत को फाड़ने के बाद गोली हड्डी को छेदते हुए बाहर निकल गयी है. गोली की तेज रफ्तार के कारण उसके मल द्वार का रास्ता भी फट गया है. मल त्याग के लिए दूसरा रास्ता बनाया गया है, लेकिन यह फिर फट सकता है. डॉ रंजन ने बताया कि सूरज की हालत काफी गंभीर है और अगले 24 घंटे तक उसकी सेहत के बारे में कुछ कहना मुश्किल है. अगर उसकी हालत ठीक होती है, तो एक माह बाद एक और ऑपरेशन करना होगा. लेकिन, अभी आंत ठीक स्थिति में नहीं है और वह दोबारा भी फट सकती है.

पिस्टल से लेकर गोलियों तक का देना होता है हिसाब
बिहार पुलिस के जवान से लेकर कप्तान तक को आवंटित हथियार और गोलियों का हिसाब पुलिस लाइन में देना होता. उन्हें आवंटित पिस्टल और गोलियों का यह हिसाब पुलिस लाइन के सार्जेट मेजर रखता है. अगर किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से किसी को गोली मारने का आरोप लगता है, तो सबसे पहले उस पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल या रिवॉल्वर को जब्त कर उसकी बैलिस्टिक जांच करायी जाती है. इस जांच में यह साबित हो जाता है कि उस पिस्टल से घटना के समय से कितनी देर पहले गोली चली थी. साथ ही साजेर्ंट मेजर उन्हें जो गोलियां उपलब्ध कराता है, उन गोलियों का हिसाब भी पुलिसकर्मी को पुलिस लाइन द्वारा जारी एक कार्ड पर अंकित करना होता है और खर्च की गयी गोली के संबंध में अपने वरीय अधिकारियों के दस्तखत से उसकी स्वीकृति भी लेनी पड़ती है. ऐसे में किसी पुलिसकर्मी के सर्विस रिवॉल्वर से चलनेवाली गोली की जांच में अब तक उस पिस्टल की बैलिस्टिक जांच क्यों नहीं करायी जा रही है, यह एक बड़ा सवाल है.

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