कभी टेंट में सोते थे यशस्वी जायसवाल, अब श्रीलंका में 30वें टेस्ट के साथ किस रिकॉर्ड पर नजर?

टेंट में रातें, पानी पुरी बेचकर गुजारा... जानिए कैसे इस युवा बल्लेबाज ने टीम इंडिया में बनाई जगह. पूरी प्रेरणादायक यात्रा.

Yashasvi Jaiswal struggle story: भारतीय क्रिकेट के युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल की कहानी सिर्फ रन, शतक और रिकॉर्ड की कहानी नहीं है. यह उस संघर्ष की कहानी है, जिसमें एक छोटे शहर से निकला बच्चा बड़े सपने लेकर मुंबई पहुंचता है, मैदान पर दिन-रात क्रिकेट सीखता है, गुजारे के लिए पानी पुरी बेचता है और कई रातें टेंट में गुजारता है. यही संघर्ष आगे चलकर उसे भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित युवा प्रतिभाओं में शामिल करता है.

उत्तर प्रदेश में जन्मे जायसवाल बेहद कम उम्र में क्रिकेट के सपने को लेकर मुंबई आ गए थे. शुरुआती दौर में वह अपने चाचा के साथ रहे, लेकिन मुंबई में स्थायी रूप से रहना आसान नहीं था. आजाद मैदान के आसपास क्रिकेट से जुड़े लोगों की मदद से उन्हें मैदान के पास टेंट में रहने की जगह मिली. वहां रहने के बदले वह मैदान से जुड़े छोटे-मोटे काम भी करते थे. रिपोर्ट के मुताबिक, वह दिन में क्रिकेट खेलते और अभ्यास करते थे तथा शाम को पानी पुरी बेचकर कुछ पैसे कमाते थे.

‘कोई काम छोटा नहीं’

यशस्वी ने हाल में राज शामानी के साथ बातचीत में अपने शुरुआती संघर्षों को याद किया. उन्होंने बताया कि उस समय उनका पूरा ध्यान क्रिकेट पर था। रहने की सुविधा सीमित थी, पैसे की परेशानी थी और कई तरह के छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे, लेकिन उनका लक्ष्य साफ था कि क्रिकेट खेलना और आगे बढ़ना. उनकी कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने किसी काम को छोटा नहीं समझा. पानी पुरी बेचना हो, मैदान के काम में मदद करनी हो या अपनी जरूरतों के लिए मेहनत करनी हो, उन्होंने हर जिम्मेदारी को अपने क्रिकेट के सपने का हिस्सा माना. हाल की रिपोर्टों में भी उनके इस नजरिए को प्रमुखता से सामने रखा गया है.

टेंट से निकला वह खिलाड़ी जिसने इतिहास रच दिया

मुंबई के मैदानों पर लगातार मेहनत ने जल्द ही यशस्वी की प्रतिभा को पहचान दिलाई. जूनियर क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय अंडर-19 टीम तक पहुंचाया. 2020 अंडर-19 विश्व कप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट में भारत की बल्लेबाजी के प्रमुख चेहरों में रहे. इसके बाद घरेलू क्रिकेट में भी उनका बल्ला लगातार बोलता रहा.

2019 में उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया. वह लिस्ट-ए क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बल्लेबाज बने. यह उपलब्धि उनके लिए सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं थी, बल्कि इस बात का संकेत थी कि आजाद मैदान में टेंट के भीतर रहने वाला वह लड़का अब बड़े मंच के लिए तैयार हो चुका है.

राजस्थान रॉयल्स ने दिया आईपीएल का बड़ा मंच

यशस्वी की घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रगति ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया. राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया. शुरुआत में उन्हें आईपीएल में खुद को स्थापित करने के लिए समय लगा, लेकिन 2023 का सीजन उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ. 2023 में उन्होंने 14 मैचों में 625 रन बनाए और एक शतक भी लगाया.

इसी दौरान उन्होंने आईपीएल इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक भी लगाया. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सितारों की सूची में ला खड़ा किया. उनकी बल्लेबाजी की खासियत सिर्फ बड़े शॉट खेलना नहीं है. वह नई गेंद के खिलाफ जोखिम लेने, गैप खोजने और पारी को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ लंबी पारी खेलने की क्षमता भी रखते हैं.

टेस्ट क्रिकेट में कदम रखते ही दिखा असली तेवर

2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू ने यशस्वी के करियर को एक और दिशा दी. डेब्यू टेस्ट में ही उन्होंने 171 रन की शानदार पारी खेली और बता दिया कि वह सिर्फ टी20 क्रिकेट के आक्रामक बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि लंबे प्रारूप में भी बड़ी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं. इंग्लैंड के खिलाफ 2024 की घरेलू टेस्ट सीरीज में तो उनका बल्ला पूरी तरह हावी रहा. उन्होंने लगातार दो दोहरे शतक लगाए. राजकोट में उनका नाबाद 214 रन का स्कोर आज भी उनके टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर है.उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और धैर्य का जो मिश्रण दिखाई देता है, वही उन्हें मौजूदा भारतीय टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल करता है.

आंकड़े खुद बताते हैं कहानी

अफगानिस्तान के खिलाफ जून 2026 में न्यू चंडीगढ़ टेस्ट तक यशस्वी 29 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. 54 पारियों में उनके नाम 2535 रन हैं और उनका औसत 48.75 है. उनके खाते में सात शतक, 13 अर्धशतक और दो दोहरे शतक हैं. उनका सर्वोच्च स्कोर 214 नाबाद है. 2024 में वह भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में रहे.

उस कैलेंडर वर्ष में उन्होंने 1478 टेस्ट रन बनाए, जो भारतीय सलामी बल्लेबाज के लिए एक कैलेंडर वर्ष में रिकॉर्ड प्रदर्शन रहा. उनकी सातों टेस्ट सेंचुरी भी अलग-अलग मैदानों पर आई हैं. वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू सेंचुरी से लेकर इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और फिर वेस्टइंडीज के खिलाफ शतकों तक, उन्होंने लगातार अलग परिस्थितियों में खुद को साबित किया है.

29 टेस्ट, 29 अलग वेन्यू

यशस्वी के करियर का एक बेहद दिलचस्प रिकॉर्ड उनके टेस्ट वेन्यू से जुड़ा है. 2025 में राजस्थान रॉयल्स ने दर्ज किया था कि उनके शुरुआती 24 टेस्ट 24 अलग-अलग मैदानों पर हुए थे. 2026 में यह सिलसिला आगे बढ़ा. न्यू चंडीगढ़ में अफगानिस्तान के खिलाफ उनका 29वां टेस्ट भी अलग मैदान पर हुआ. अब श्रीलंका दौरे पर यह रिकॉर्ड और आगे बढ़ने वाला है. भारतीय टीम 15 अगस्त से गॉल में श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू करेगी और दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा.

बीसीसीआई की आधिकारिक घोषणा में यशस्वी को टेस्ट टीम में शामिल किया गया है. यानी गाले में उतरते ही यशस्वी अपने करियर का 30वां टेस्ट मैच 30वें अलग टेस्ट वेन्यू पर खेलते नजर आएंगे. यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर खिलाड़ी अपने करियर के दौरान एक ही मैदान पर कई बार टेस्ट खेलते हैं, जबकि यशस्वी के करियर की शुरुआत ही अलग-अलग परिस्थितियों और मैदानों से होती रही है.

श्रीलंका में सामने होगी स्पिन की नई चुनौती

अब यशस्वी के सामने एक अलग तरह की परीक्षा है. दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों का सामना करने के बाद अब उन्हें श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन का सामना करना होगा. गाले की पिच पर टेस्ट मैच के आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.

ऐसे में यशस्वी के फुटवर्क, डिफेंस और स्पिन के खिलाफ स्ट्राइक रोटेट करने की क्षमता पर खास नजर रहेगी. भारत ने श्रीलंका दौरे के लिए शुभमन गिल की कप्तानी में टीम चुनी है. यशस्वी के साथ केएल राहुल भी बल्लेबाजी क्रम में अहम भूमिका में होंगे. टीम में रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मैनव सुथार जैसे स्पिन विकल्प भी मौजूद हैं.

अब गाले में बड़ी पारी की उम्मीद

श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले भारत ने कोलंबो में चार दिवसीय अभ्यास मैच खेला. इस मुकाबले में यशस्वी ने अपनी लय हासिल करने के संकेत दिए. सीरीज शुरू होने से पहले उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास दिखाई देना टीम के लिए अच्छी खबर है. भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र में महत्वपूर्ण मुकाबलों की शुरुआत भी है. 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाला पहला टेस्ट इसलिए सिर्फ एक सीरीज का मुकाबला नहीं होगा, बल्कि भारतीय टीम के नए टेस्ट चक्र के लिए भी अहम पड़ाव होगा.

सुबह की मेहनत से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक कायम है अनुशासन

यशस्वी की सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि उनकी दिनचर्या और मानसिक तैयारी को भी बड़ी वजह माना जाता है. राज शामानी के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि अभ्यास के दिनों में वह सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच उठते हैं और ध्यान के बाद ट्रेनिंग शुरू करते हैं. जिस प्रारूप के लिए तैयारी करनी होती है, उसके हिसाब से अभ्यास का तरीका भी बदलता है. टी20 में तेजी और शॉट-मेकिंग, वनडे में पारी को अलग-अलग चरणों में संभालना और टेस्ट में लंबे समय तक एकाग्र रहना कि यशस्वी की तैयारी का हिस्सा है. उनका जोर मैच जैसी परिस्थितियों को नेट्स में दोहराने और हर गेंद से सीखने पर रहता है.

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By ऋतु राज

ऋतुराज प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर हैं. लीची की नगरी मुजफ्फरपुर (बिहार) से ताल्लुक रखने वाले ऋतुराज के पास डिजिटल खेल पत्रकारिता में 1 साल का गहरा अनुभव है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से साल 2025 में मीडिया रिसर्च में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खेल की हर छोटी-बड़ी और वायरल होती खबरों पर पैनी नजर रखना उनकी खासियत है. उनका मुख्य लक्ष्य प्रभात खबर के पाठकों तक खेल जगत की हर सटीक और विश्लेषण से भरी खबर सबसे पहले पहुंचाना है. पढ़ने और क्रिकेट खेलने के शौकीन ऋतुराज खेल को सिर्फ कवर नहीं करते, बल्कि उसकी बारीकियों को जीते हैं.

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