Vaibhav Suryavanshi Bcci Protocol: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अपने कड़े नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए जाना जाता है, और खिलाड़ी भी इसका पूरी तरह सम्मान करते हैं. इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक हालिया वीडियो ने सबका ध्यान खींचा है. इस वीडियो में भारत के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी बीसीसीआई की सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करते हुए नज़र आ रहे हैं. उनका यह अनुशासित व्यवहार यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य कितने सुरक्षित और जिम्मेदार हाथों में है.
साथी खिलाड़ियों से अलग नजर आए वैभव
वीडियो की सबसे खास बात यह है कि जहां पूरी टीम एक साथ ग्रुप में आगे बढ़ रही है, वहीं वैभव सूर्यवंशी सबसे अलग, अकेले ही अपनी धुन में चलते दिख रहे हैं. उनका यह फोकस और डिसिप्लिन यह साबित करने के लिए काफी है कि वे बीसीसीआई के हर एक प्रोटोकॉल को कितनी संजीदगी से निभा रहे हैं. युवा खिलाड़ी का यह मैच्योरिटी लेवल वाकई तारीफ के काबिल है.
कोच टी. दिलीप ने बढ़ाया हौसला
हालांकि, वैभव सूर्यवंशी को अकेला देखकर भारतीय टीम के फील्डिंग कोच टी. दिलीप (दिलीप सर) ने तुरंत स्थिति को संभाला और उनका साथ दिया. वायरल वीडियो के अंत में देखा जा सकता है कि दिलीप सर ने आगे बढ़कर युवा खिलाड़ी को जॉइन किया और उनके कंधे पर हाथ रखकर, बातचीत करते हुए उनके साथ आगे बढ़े. कोच का यह व्यवहार टीम के भीतर के शानदार तालमेल और सपोर्ट सिस्टम को दर्शाता है.
वैभव सूर्यवंशी का टीम से अलग दिखना कोई विवाद नहीं, बल्कि नियम है
भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का टीम इंडिया के बाकी खिलाड़ियों से थोड़ा अलग चलना महज एक इत्तेफाक है. आईसीसी (ICC) या ईसीबी (ECB) का कोई भी नियम उन्हें अपने साथियों के साथ घूमने, खेलने या अभ्यास करने से नहीं रोकता. वैभव पूरी तरह टीम का हिस्सा हैं, बस वो सीनियर खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम या चेंजिंग रूम शेयर नहीं कर सकते. दरअसल, आईसीसी और ईसीबी के सुरक्षा नियमों के तहत, जब तक कोई खिलाड़ी 16 वर्ष का नहीं हो जाता, वह सीनियर टीम के चेंजिंग रूम का इस्तेमाल नहीं कर सकता. हालांकि, मैच, टीम मीटिंग और नेट प्रैक्टिस के दौरान वह हर पल टीम के साथ ही रहेंगे.
इंग्लैंड-आयरलैंड दौरे पर साथ रहेंगे माता-पिता
सिर्फ 15 साल की उम्र में टीम इंडिया का हिस्सा बने वैभव सूर्यवंशी के लिए बीसीसीआई ने अपने सामान्य नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने उनके माता-पिता को भी टीम के साथ आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर भेजने का फैसला किया है, और इस पूरे दौरे का खर्च बीसीसीआई खुद उठा रही है. इस फैसले की वजह साफ करते हुए बीसीसीआई सेक्रेटरी देवाजीत सैकिया ने बताया कि 15 साल के बच्चे के लिए सीधे सीनियर टीम के माहौल में ढलना आसान नहीं होता. ऐसे में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने और बेहतर तालमेल बिठाने के लिए माता-पिता का साथ होना बेहद जरूरी है.
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