जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में तूफानी अर्धशतक जड़ने वाले 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपनी यादगार पारी को परिवार, कोच और अपने संघर्ष के दिनों में साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि करियर की शुरुआत में इस तरह का प्रदर्शन आगे के मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने में बेहद मददगार होता है.
हरारे में वैभव का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन
हरारे में खेले गए मुकाबले में वैभव ने महज 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 4 चौके और 4 छक्के लगाए. इसके साथ ही वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए. उन्होंने 15 साल 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर इंग्लैंड के लुई ब्रूस (16 साल 56 दिन) का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इतना ही नहीं, वैभव अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं. उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला (15 साल 340 दिन) का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया.
परिवार और कोच को समर्पित किया अर्धशतक
बीसीसीआई डॉट टीवी से बातचीत में वैभव ने कहा,
जब आप अपने करियर की शुरुआत में होते हैं और ऐसी पारियां खेलते हैं, तो इससे आगे के मैचों के लिए काफी आत्मविश्वास मिलता है. उस समय मुझे लगा कि मैं अच्छी लय में हूं और मैंने अपनी ताकत के अनुसार बल्लेबाजी की. मैं यह अर्धशतक अपने परिवार, अपने कोच और उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने मेरे अच्छे और बुरे समय में मेरा साथ दिया.
मां के लिए था खास सेलिब्रेशन
अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव ने दोनों हाथों से सिर के ऊपर 'A' का निशान बनाया और फिर थंब्स-अप का इशारा किया. इस खास सेलिब्रेशन के बारे में उन्होंने बताया, "वह सेलिब्रेशन मैंने अपनी मां आरती के लिए किया था. वहीं थंब्स-अप वाला इशारा रिंकू सिंह के साथ हुई बातचीत से जुड़ा था."
हरारे बना वैभव का पसंदीदा मैदान
हरारे का मैदान वैभव सूर्यवंशी के लिए लगातार यादगार साबित हो रहा है. इसी साल उन्होंने यहीं आईसीसी अंडर-19 विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी. इससे पहले सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाकर उन्होंने भारत को रिकॉर्ड छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. अब इसी मैदान पर उन्होंने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला अर्धशतक भी जड़कर एक और सुनहरी याद जोड़ दी.
ये भी पढ़ें: CWG 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स से क्रिकेट क्यों हुआ बाहर?
