सुरेश रैना की नजर ने बदली किस्मत, जानिए समीर रिजवी की संघर्ष से आईपीएल तक पहुंचने की कहानी

IPL: समीर रिजवी की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. बचपन में मामा के साथ मैदान से शुरू हुआ उनका सफर आज आईपीएल तक पहुंच चुका है. कई मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से एक उभरते क्रिकेटर के रूप में पहचान बनाई है.

IPL: दाएं हाथ के सुरेश रैना कहे जाने वाले समीर रिजवी आज क्रिकेट में जाने-माने नाम हैं. उनकी कहानी काफी संघर्ष और मेहनत भरी है. दिल्ली कैपिटल्स को पिछले सीजन में आखिरी जीत दिलाने और इस सीजन की शुरुआत जीत से कराने वाले समीर ने बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट के प्रति अपना हुनर दिखाना शुरू कर दिया था. समीर बचपन से ही अपने मामा तनकीब अख्तर के साथ क्रिकेट मैदान जाया करते थे. वहीं खेलते-खेलते उन्होंने गेंद पकड़ना और फील्डिंग करना सीख लिया. शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यही बच्चा आगे चलकर बड़ा खिलाड़ी बनेगा.

जब रिजवी पर पड़ी रैना की नजर

2011 में यूपी और सौराष्ट्र के बीच एक रणजी मैच के दौरान जब सुरेश रैना मैदान पर थे तब उनकी नजर समीर पर पड़ी. समीर की फुर्ती और खेल को देखकर रैना ने उनकी तारीफ की. बस यही पल समीर के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया. इसके बाद उनके मामा तनकीब अख्तर ने उन्हें सही तरीके से ट्रेनिंग देना शुरू किया.

अंडर-14 के पहले मैच में जड़ा शतक

मेरठ के रहने वाले तनकीब खुद भी क्रिकेटर रहे हैं. उन्होंने पढ़ाई के बाद क्रिकेट में करियर बनाने का फैसला किया और गांधी बाग क्रिकेट अकादमी में कोचिंग शुरू की. समीर भी उनके साथ रोज मैदान जाते और घंटों अभ्यास करते थे.

धीरे-धीरे समीर की फील्डिंग और बल्लेबाजी दोनों में सुधार हुआ. अंडर-14 के अपने पहले ही मैच में उन्होंने शतक जड़ दिया, जिससे चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया. 6 दिसंबर 2003 को जन्मे समीर दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और ऑफ-ब्रेक गेंदबाजी करते है.

झटका लगने के बाद खुद को संभाला

अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में जगह न मिलना उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने खेल पर फोकस किया और लगातार मेहनत करते रहे. उनके खेलने का अंदाज काफी हद तक सुरेश रैना जैसा है, इसलिए उन्हें दाएं हाथ का रैना भी कहा जाता है.

सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया. आज वह लिमिटेड ओवरों के क्रिकेट में एक आक्रामक मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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