R Praggnanandhaa: मंगलवार को नॉर्वे चेस 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल चेस में दूसरी बार मात दे दी. कार्लसन को उनके ही घर में हराने के बाद अब प्रज्ञानंद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का पहला भारतीय चैंपियन बनने की रेस में मजबूती से डटे हुए हैं.
प्रज्ञानंद ने रचा इतिहास
इस प्रतिष्ठित एलीट डबल राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट में प्रज्ञानंद ने एक अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम किया है. वह इस साल क्लासिकल मुकाबले में कार्लसन को दो बार हराने वाले दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी बन गए हैं, जिसने उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की लिस्ट में सबसे आगे खड़ा कर दिया है. इस जीत से 20 वर्षीय प्रज्ञानंद के कुल 12 अंक हो गए हैं और वे अंक तालिका में तीसरे स्थान पर आ गए हैं. इस हार से कार्लसन को तगड़ा झटका लगा है. टूर्नामेंट में अब केवल दो राउंड बचे हैं और कार्लसन के लिए अपना आठवां खिताब बचाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है.
नंबर 1 का घमंड टूटा
कार्लसन के लिए यह टूर्नामेंट उनकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. उन्हें क्लासिकल फॉर्मेट में कुल चार हार का सामना करना पड़ा, जिसमें से दो बार उन्हें इस युवा भारतीय खिलाड़ी ने पराजित किया. ऐसा कारनामा करने वाले प्रज्ञानंद पहले भारतीय बन गए हैं। इस शानदार प्रदर्शन के बाद यह स्पष्ट है कि प्रज्ञानंद अब कार्लसन के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को सीधी चुनौती देने वाले दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं.
गुकेश की उम्मीदें टूटीं
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो ने अपना शानदार खेल जारी रखते हुए अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर अपनी पकड़ मजबूत रखी है. उन्होंने आर्मागेडन टाई-ब्रेक में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर अपने कुल अंक 14 कर लिए हैं. उधर, फ्रांस के अलीरेज़ा फ़िरोज़ा ने बड़ा मुकाबला जीतते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश को क्लासिकल मैच में हराया और 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए. इस हार ने गुकेश की उम्मीदों को भारी नुकसान पहुंचाया है और उनका खिताब जीतने का सपना लगभग खत्म हो गया है. 8 अंकों पर मौजूद गुकेश अगर अपने अंतिम दोनों मैच जीत भी लें, तो भी वह सिर्फ 14 अंकों तक पहुंच सकेंगे, जिससे खिताब की रेस में बने रहना बेहद मुश्किल है. इस टूर्नामेंट में यह विश्व चैंपियन डी. गुकेश की तीसरी क्लासिकल हार थी.
प्रज्ञानंद की नजरें ऐतिहासिक खिताब पर
बतौर वर्ल्ड चैंपियन, गुकेश इस साल के अंत में उज़्बेक चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ होने वाले अपने खिताबी मुकाबले से पहले इन बड़े टूर्नामेंटों में अपनी लय और फॉर्म को परखने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ, आर प्रज्ञानंद के लिए चैंपियन बनने का सपना पूरी तरह जिंदा है. कार्लसन को उनके ही देश में दो बार धूल चटाकर इस भारतीय सितारे ने खिताब की रेस को बेहद रोमांचक बना दिया है.
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