India journey from 1st Test to 600th Test: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बुधवार का दिन बेहद खास रहा. श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेला गया पहला टेस्ट भारत का 600वां टेस्ट मैच था और टीम इंडिया ने इसे 165 रन की शानदार जीत के साथ यादगार बना दिया. देवदत्त पडिक्कल के शानदार शतक और मानव सुथार के मैच में 10 विकेट के दम पर भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली.
1932 में अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में कदम रखने के बाद से भारत का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. एक समय भारतीय टीम को स्पिन के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ टीम ने तेज गेंदबाजी में भी अपनी अलग पहचान बनाई. सीके नायडू से लेकर कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली तक कई दिग्गजों ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
600 टेस्ट का सफर छह पड़ावों में
भारत के पहले 600 टेस्ट मैचों को 100-100 मैचों के छह हिस्सों में बांटें तो टीम की प्रगति साफ नजर आती है.
| टेस्ट मैच | जीत | हार | ड्रॉ | टाई | जीत-हार अनुपात |
| 1 से 100वां | 10 | 40 | 50 | 0 | 0.25 |
| 101 से 200वां | 25 | 32 | 43 | 0 | 0.78 |
| 201 से 300वां | 21 | 26 | 52 | 1 | 0.80 |
| 301 से 400वां | 32 | 31 | 37 | 0 | 1.03 |
| 401 से 500वां | 42 | 28 | 30 | 0 | 1.50 |
| 501 से 600वां | 57 | 31 | 2 | 0 | 1.83 |
आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अपने 300वें टेस्ट के बाद टेस्ट क्रिकेट में जीत की रफ्तार तेजी से बढ़ाई. 301वें से 600वें टेस्ट के बीच भारत ने 131 मुकाबले जीते, 90 हारे और 69 मैच ड्रॉ रहे. इस दौरान टीम का जीत प्रतिशत 43 फीसदी से अधिक रहा. इसके मुकाबले पहले 300 टेस्ट में भारत ने सिर्फ 56 मैच जीते थे, जबकि 98 में हार मिली और 145 मुकाबले ड्रॉ रहे. इस दौरान टीम का जीत प्रतिशत महज 18 फीसदी था.
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स्पिन के दबदबे से तेज गेंदबाजी की ताकत तक
1960 और 1970 के दशक में भारतीय टेस्ट टीम की पहचान उसकी स्पिन चौकड़ी से थी. बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन जैसे गेंदबाजों ने दुनिया के बल्लेबाजों को खूब परेशान किया. हालांकि, आधुनिक दौर में भारत ने तेज गेंदबाजी में भी जबरदस्त ताकत हासिल की. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद सिराज और भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाजों ने विदेशी परिस्थितियों में भी भारत को मैच जिताए. वहीं रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे स्पिनरों ने टीम की गेंदबाजी को और मजबूत किया.
बल्लेबाजी में भी भारत ने बनाए बड़े सितारे
भारत ने टेस्ट क्रिकेट में कई महान बल्लेबाज दिए हैं. सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली जैसे बल्लेबाजों ने लंबे समय तक टीम की बल्लेबाजी को मजबूती दी. इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ भारत के लिए रन बनाए, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी के नए मानक भी स्थापित किए.
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21वीं सदी में बदली भारत की टेस्ट किस्मत
21वीं सदी में सौरव गांगुली, एमएस धोनी और विराट कोहली की कप्तानी ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट को अलग-अलग तरीके से नई दिशा दी. गांगुली ने युवा खिलाड़ियों को मौका देकर मजबूत टीम तैयार की, धोनी की कप्तानी में भारत टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 बना और विराट कोहली के दौर में फिटनेस तथा तेज गेंदबाजी को टीम की पहचान बनाया गया.
21वीं सदी में भारत ने 270 टेस्ट मैचों में से 126 जीते, 79 हारे और 65 ड्रॉ रहे. इस दौरान भारत का जीत प्रतिशत 46 फीसदी से अधिक रहा. विदेशी जमीन पर भी भारत का प्रदर्शन पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ. इस सदी में टीम ने विदेश में खेले 146 टेस्ट में 51 मैच जीते, 59 हारे और 36 मुकाबले ड्रॉ रहे. भारत ने इस दौरान न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दर्ज की.
विराट कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान
विराट कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं. उन्होंने 68 टेस्ट में कप्तानी करते हुए 40 मैचों में भारत को जीत दिलाई. 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एमएस धोनी की अनुपस्थिति में उन्होंने पहली बार टेस्ट कप्तानी संभाली थी. कोहली की कप्तानी में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती. इसके अलावा उनकी कप्तानी में भारत ने SENA देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में कुल सात टेस्ट जीते, जो किसी एशियाई कप्तान के लिए सबसे ज्यादा हैं.
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600वें टेस्ट में भी भारत ने लिखी जीत की कहानी
भारत ने 600वें टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. देवदत्त पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने 230 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौके और एक छक्का लगाया. केएल राहुल ने 82 और ध्रुव जुरेल ने 51 रन बनाए. भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए. जवाब में श्रीलंका की टीम पहली पारी में 284 रन ही बना सकी. भारत को पहली पारी के आधार पर 178 रन की बढ़त मिली.
वहीं दूसरी पारी में भारतीय टीम 193 पर ही सिमट गई. पहली पारी में मिली 178 रन की बढ़त के बदौलत भारत ने 371 रन बनाए. श्रीलंका को जीत के लिए 372 रन का टारगेट दिया गया. इस लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 206 रन बनाकर आउट हो गई. इस तरह भारत ने अपने 600वें टेस्ट को 165 रन की जीत के साथ यादगार बना दिया और सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली. यह जीत भारतीय टेस्ट क्रिकेट के लंबे सफर में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ गई. भारत ने 600 टेस्ट मैच में 187 जीत हासिल की है.
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