एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 से पहले भारतीय टीम की नई भगवा (केसरिया) जर्सी को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच उपकप्तान हार्दिक सिंह ने इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला किसी अन्य कारण से नहीं, बल्कि पूरी तरह टीम की रणनीति और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है.
नीली जर्सी से हो रही थी दिक्कत
विश्व कप से पहले एएनआई से बातचीत में हार्दिक सिंह ने कहा कि भारतीय टीम लंबे समय से नीली जर्सी पहनती रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब ज्यादातर मुकाबले नीले रंग की एस्ट्रोटर्फ पर खेले जाते हैं. ऐसे में कई बार नीली जर्सी मैदान की सतह से मेल खा जाती है, जिससे खिलाड़ियों को अपने साथी खिलाड़ियों की पहचान करने में दिक्कत होती है. उन्होंने कहा कि टीम ने इसी वजह से नई जर्सी को आजमाने का फैसला किया है.
'यह हमारी रणनीति और टैक्टिक्स का हिस्सा'
हम कुछ नया करना चाहते थे. हमारी पुरानी नीली जर्सी एस्ट्रोटर्फ के रंग से मिल जाती थी और हमें कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता था. अगर ऑरेंज जर्सी हमारे लिए फायदेमंद साबित होती है तो इसे आजमाने में कोई बुराई नहीं है. यह हमारी रणनीति और एक टैक्टिकल फैसला है. हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना है.
27 वर्षीय हार्दिक सिंह ने आगामी विश्व कप को अपने करियर का तीसरा विश्व कप बताते हुए कहा कि चार साल में एक बार होने वाला यह टूर्नामेंट किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास होता है. उन्होंने कहा कि पूरी टीम इस प्रतियोगिता को लेकर उत्साहित है और तैयारियां सही दिशा में चल रही हैं.
हॉकी इंडिया ने भी दी सफाई
हॉकी इंडिया ने भी आधिकारिक बयान जारी कर साफ किया कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सिफारिश के बाद विस्तृत चर्चा के आधार पर लिया गया. संस्था के अनुसार, नीली जर्सी और नीली सिंथेटिक टर्फ के कारण खिलाड़ियों की ऑन-फील्ड विजिबिलिटी प्रभावित हो रही थी. इसी वजह से कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया रंग की जर्सी का सुझाव दिया, जिसके बाद केसरिया रंग को अंतिम रूप दिया गया.
पहले भी बदल चुकी है टीम इंडिया की जर्सी
हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि केसरिया रंग केवल तकनीकी जरूरतों को पूरा नहीं करता, बल्कि यह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों में से एक है, जो साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है. संस्था ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पहले भी बदला जा चुका है. 2014 हॉकी विश्व कप में टीम ने पीली जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 विश्व कप में स्काई ब्लू रंग की नई डिजाइन वाली जर्सी का इस्तेमाल किया गया था.
नई जर्सी को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान और ओलंपियन वीरन रासक्विन्हा समेत कई लोगों ने सवाल उठाए हैं, वहीं कुछ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. हालांकि, हार्दिक सिंह और हॉकी इंडिया दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मैदान पर बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है.
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