World Cup : महेंद्र सिंह धौनी कप्तान नहीं फिल्म डायरेक्टर हैं, जानिए रविचंद्रन अश्विन ने ऐसा क्यों कहा…

हर्षा भोगले ने महेंद्र सिंह धौनी के बारे में बात करते हुए कहा कि वे व्हाइट बाॅल के बेहतरीन कप्तान थे. फिर वे रेड बाॅल के कप्तान बने. वे एक ऐसे कप्तान थे जो अपने रिसोर्स के साथ बेहतरीन तरीके से खेलना जानते थे. वे जानते थे कि अगर 10 विकेट नहीं गिरा सकते हैं, तो कैसे 50 ओवर तक मैच को लेकर जा सकते हैं.

वर्ल्ड कप 2023 के आगाज से एक दिन पहले भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी टीम इंडिया के कप्तान नहीं बल्कि एक फिल्म डायरेक्टर थे. रविचंद्रन अश्विन ने अपने यू-ट्‌यूब चैनल kutti stories with ash में कमेंटेटर हर्षा भोगले के साथ 2011 विश्वकप की यादों को ताजा करते हुए उक्त बातें कही. रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि धौनी उस फिल्म डायरेक्टर की तरह हैं जो कैरेक्टर के हिसाब से अपने कलाकारों को चुनता है, उसी तरह महेंद्र सिंह धौनी मैच के दौरान करते थे, वे मैच की परिस्थिति के अनुसार अपने खिलाड़ियों का प्रयोग करते थे.

बाॅल रूकते ही शुरू हो जाता था धौनी का गेम

हर्षा भोगले ने महेंद्र सिंह धौनी के बारे में बात करते हुए कहा कि वे व्हाइट बाॅल के बेहतरीन कप्तान थे. फिर वे रेड बाॅल के कप्तान बने. वे एक ऐसे कप्तान थे जो अपने रिसोर्स के साथ बेहतरीन तरीके से खेलना जानते थे. वे यह जानते थे कि अगर वे 10 विकेट नहीं गिरा सकते हैं, तो वे कैसे 50 ओवर तक मैच को लेकर जा सकते हैं. उनकी ये खासियत थी कि जैसे ही गेंद रूकती थी,धौनी का मैच शुरू हो जाता था. एक गेंद के बाद जब दूसरी गेंद फेंकी जाती थी उसके बीच के वक्त में धौनी का मैच चलता था. कौन सी गेंद फेंकी जानी है, फील्डिंग कैसे सेट होना है सबकुछ वे तय करते थे.

धौनी को खुद पर था भरोसा

अश्विन ने बातचीत के दौरान बताया कि मैं हमेशा धौनी से पूछता था कि अपनी बैंटिंग को कैसे सुधारूं क्योंकि उनके बाद मैं दूसर व्यक्ति था जो ग्राउंड पर आता था. वे हमेशा यही कहते थे कि मैं अपने अंदर यह विश्वास रखता हूं कि मैं किसी भी बाॅल को कभी भी ग्राउंड के बाहर कर सकता हूं. इसपर हर्षा ने कहा कि यह एक बड़ी बात है लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि आपमें यह भरोसा हो और आप उस भरोसे का समय पर इस्तेमाल भी कर पाएं. यह तमाम चीजें धौनी के अंदर थी. अश्विन ने कहा कि वे ओडीआई सीरीज के दौरान हमेशा नेट पर नजर आते थे, इसलिए कि उन्हें मैच को समझना होता था और वे हर चीजों को बारीकी से समझते थे.

कुट्टी स्टोरीज विद ऐश का पांचवां एपिसोड

कुट्टी स्टोरीज विद ऐश का आज पांचवां एपिसोड जारी हुआ है. इस एपिसोड में अश्विन और हर्षा भोगले ने 2011 विश्वकप की चर्चा की. अश्विन का यह शो इन दिनों में चर्चा में है, जिसमें विश्वकप से जुड़ी कई रोचक कहानियों की चर्चा हो रही है. कुट्टी स्टोरीज के पांचवें एपिसोड में सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह के बारे में खूब चर्चा हुई. इस एपिसोड को ‘ The Pinnacle’ नाम दिया गया है, जिसका अर्थ होता है शिखर.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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