सनराइजर्स हैदराबाद की खूबसूरत CEO काव्या मारन को कितना जानते हैं आप? जानिए सोशल मीडिया पर क्यों हो रही ट्रोल

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सनराइजर्स हैदराबाद की खूबसूरत CEO काव्या मारन को कितना जानते हैं आप? जानिए सोशल मीडिया पर क्यों हो रही ट्रोल

आईपीएल ऑक्शन 2024 में सनराइजर्स हैदराबाद ने जैसे ही पिट कमिंस को 20.5 करोड़ रुपये में खरीदा, कमिंस के साथ ही सनराइजर्स हैदराबाद की सीईओ काव्या मारन सोशल मीडिया में ट्रेंड करने लगी और हर कोई यह जानने की इच्छा रख रहा है कि आखिर कौन है वह शख्स जिसने पिट कमिंस पर इतने रुपये खर्च किए हैं.

IPL Auction 2024 : आईपीएल ऑक्शन 2024 में सनराइजर्स हैदराबाद ने जैसे ही पिट कमिंस को 20.5 करोड़ रुपये में खरीदा, कमिंस के साथ ही सनराइजर्स हैदराबाद की सीईओ काव्या मारन सोशल मीडिया में ट्रेंड करने लगी और हर कोई यह जानने की इच्छा रख रहा है कि आखिर कौन है वह शख्स जिसने पिट कमिंस पर इतने रुपये खर्च किए हैं.

पिट कमिंस के लिए अपने वाॅलेट से 20.5 करोड़ खर्च करे वाली काव्या मारन, एक बिजनेस वूमेन हैं. वे 2018 में सनराइजर्स हैदराबाद की सीईओ बनी है. काव्या मारन बेहद खूबसूरत हैं और अभी मात्र 31 साल की हैं.

काव्या मारन ना सिर्फ सनराइजर्स हैदराबाद की प्रतिभाशाली सीईओ हैं, बल्कि वे अपनी उपस्थिति से टीम के प्रदर्शन पर बहुत ही खूबसूरत प्रभाव डालती हैं.

काव्या मारन ‘सन नेटवर्क’ के संस्थापक अरबपति बिजनेस मैन कलानिधि मारन और व्यवसायी महिला कावेरी मारन की बेटी हैं. काव्या मारन का परिवार सिर्फ बिजनेस से जुड़ा नहीं है, उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव भी है. काव्या के दादा, मुरासोली मारन, पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री थे और उनके चाचा दयानिधि मारन केंद्रीय मंत्री थे.

मारन परिवार के समृद्ध विरासत का प्रभाव काव्या मारन की जीवन पर पड़ा है इसमें कोई शक नहीं है. काव्या ने चेन्नई के स्टेला मैरिस कॉलेज से वाणिज्य की डिग्री हासिल की है और उसके बाद उन्होंने यूके के वारविक बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है.

यूके से एमबीए करने वाली काव्या मारन की रुचि सिर्फ क्रिकेट में ही नहीं है. वे इससे अलग क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं. काव्या के ऊपर सन नेटवर्क के सन म्यूजिक और एफएम चैनलों की भी जिम्मेदारी है.

काव्या मारन इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं और यह बात तब उजागर हुई जब रजनीकांत अभिनीत फिल्म ‘जेलर’ के म्यूजिक लॉन्च में काव्या मारन शामिल हुईं. जेलर मूवी सन पिक्चर्स द्वारा निर्मित फिल्म है.

सनराइजर्स हैदराबाद के पिट कमिंस को 20.5 करोड़ और ट्रेविस हेड को 6.8 करोड़ में खरीदने के बाद काव्या मारन जहां बहुत खुश नजर आईं वहीं सोशल मीडिया में उन्हें खूब ट्रोल भी किया जा रहा है. वहीं पिट कमिंस पर 20 करोड़ से ज्यादा खर्च करने पर सोशल मीडिया में यह कमेंट आ रहा है कि ‘पापा का पैसा फालतू में उड़ा दूंगी, उनको क्या पता चलेगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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