क्‍लासिकल डांसर बनना चाहती थी मिताली राज

एक समय क्लासिकल डांस में अपना कैरियर बनाने की चाहत रखनेवाली टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज ने क्लासिकल बल्लेबाजी में अपना परचम लहराया है. वह बुधवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिस्टल में खेले गये वीमेंस वर्ल्ड कप के लीग मुकाबले में वनडे क्रिकेट में 6000 रन पूरा करनेवाली विश्व की पहली महिला क्रिकेटर बनीं. […]

एक समय क्लासिकल डांस में अपना कैरियर बनाने की चाहत रखनेवाली टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज ने क्लासिकल बल्लेबाजी में अपना परचम लहराया है. वह बुधवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिस्टल में खेले गये वीमेंस वर्ल्ड कप के लीग मुकाबले में वनडे क्रिकेट में 6000 रन पूरा करनेवाली विश्व की पहली महिला क्रिकेटर बनीं.

मिताली ने इंगलैंड की कारलोट एडवर्ड्स को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 5992 वनडे रन बनाये थे. खास बात यह है कि मिताली बचपन में क्लासिकल डांसर बनना चाहती थीं और 10 साल की उम्र में वह भरतनाट्यम में पारंगत भी हो गयी थीं, पर मिताली बचपन में काफी आलसी भी थीं. एयरफोर्स में अधिकारी रहे उनके पिता दुराई राज को यह बिल्कुल नहीं पसंद था. इसलिए उन्होंने बेटी को क्रिकेट में हाथ आजमाने की सलाह दी, ताकि वे अनुशासन में और फिटनेस में रहें.

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खास बात यह थी कि मिताली की मां लीला राज भी क्रिकेटर थीं. जोधपुर में जन्मी मिताली का क्रिकेट कैरियर हैदराबाद में स्कूली क्रिकेट से शुरू हुआ और सात साल की मेहनत के बाद 17 साल की उम्र में उनका चयन टीम इंडिया के लिए हो गया. इसके बाद उन्होंने कभी मुड़ कर नहीं देखा. कोहली की तरह फिनिशर : भारतीय पुरुष टीम के कप्तान विराट कोहली की तरह ही मिताली को चेस करना पसंद है. कोहली का जहां दूसरी इनिंग में बल्लेबाजी औसत 66.26 है, वहीं मिताली ने दूसरी पारी में 65.07 की औसत से बल्लेबाजी की है. मिताली का सफल चेसिंग औसत 109.68 रन प्रति पारी है.

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* 18 वर्षों से टीम की अहम हिस्सा : मिताली राज ने 1999 में पहला वनडे मैच खेला था. यह मैच मिल्टन कीनेस में आयरलैंड के खिलाफ हुआ. इसमें उन्होंने नाबाद 114 रन बनाये. इसके बाद टीम की अहम हिस्सा बन गयीं. 2001-2002 में लखनऊ में इंगलैंड के विरुद्ध प्रथम टेस्ट मैच खेला. मिताली का टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में रन औसत 51 से अधिक है. वनडे में 1500 या उससे अधिक रन बनानेवाली महिला क्रिकेटरों में वे केवल दूसरी हैं, जिनकी औसत 50 से अधिक हो.

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