Shreyas iyer: भारत के टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से सीरीज गंवाने के बाद स्वीकार किया कि यह हार टीम के लिए काफी निराशाजनक रही. शनिवार (10 जुलाई) को खेले गए पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में भी भारत को 56 रन से हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ टीम न केवल सीरीज में जीत से महरूम रही बल्कि आईसीसी टी20 टीम रैंकिंग में अपना नंबर-1 स्थान भी गंवा बैठी. मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अय्यर ने कहा कि लगातार हार "निश्चित रूप से चुभी", लेकिन यह दौरा उनके और टीम दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख भी साबित होगा.
इंग्लैंड के विशाल लक्ष्य से भारत पूरी तरह बैकफुट पर
मैनचेस्टर में खेले गए अंतिम मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 257/3 का विशाल स्कोर खड़ा किया. भारतीय गेंदबाज पूरे मैच में संघर्ष करते नजर आए और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने 17 छक्के जड़ दिए, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के खिलाफ लगाए गए दूसरे सबसे ज्यादा छक्के हैं. जवाब में भारतीय टीम लक्ष्य से काफी पीछे रह गई और उसे 56 रन से हार झेलनी पड़ी. इस हार के साथ भारत का इंग्लैंड दौरा बिना किसी जीत के समाप्त हुआ.
"हर मैदान और हर परिस्थिति नई चुनौती थी"
श्रेयस अय्यर ने हार के कारणों पर खुलकर बात करते हुए कहा कि लगातार अलग-अलग मैदानों पर यात्रा करना और परिस्थितियों के अनुसार तेजी से खुद को ढालना टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा. उन्होंने कहा, "हम लगातार एक मैदान से दूसरे मैदान जा रहे थे. हर जगह मैदान के आयाम, परिस्थितियां और पिच अलग थीं. हम जितनी जल्दी इन परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना चाहते थे, उतना नहीं कर पाए. दूसरी तरफ इंग्लैंड ने तीनों विभागों में शानदार क्रिकेट खेली और यही सबसे बड़ा अंतर रहा."
फील्डिंग रही सबसे बड़ी कमजोरी
अय्यर ने माना कि पूरी सीरीज में भारतीय टीम की फील्डिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी के अलावा फील्डिंग में भी टीम कई मौकों पर पीछे रही, जबकि इंग्लैंड ने हर मौके का पूरा फायदा उठाया. उनके अनुसार किसी भी बड़े मुकाबले में तीनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन जरूरी होता है और भारत इसमें सफल नहीं हो सका.
"सिर्फ इंग्लैंड आकर सीरीज जीतने की सोच काफी नहीं"
कप्तान ने कहा कि इस दौरे से सबसे बड़ी सीख यही मिली कि विदेशी परिस्थितियों में सफलता के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं होती. उन्होंने कहा, "जब मैं कहता हूं कि यह बड़ी सीख है तो उसका मतलब यही है कि केवल यह सोचकर इंग्लैंड नहीं आ सकते कि सीरीज जीत जाएंगे. इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. मुझे लगता है कि हमने तैयारी की थी, लेकिन इंग्लैंड ने पूरे टूर्नामेंट में तीनों विभागों में बेहतरीन क्रिकेट खेली और उसी का परिणाम उन्हें मिला."
कप्तान के तौर पर मुश्किल शुरुआत
श्रेयस अय्यर अब तक सात टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की कप्तानी कर चुके हैं. इनमें से छह मुकाबलों में भारत को हार मिली, जबकि एक मैच बिना किसी नतीजे के समाप्त हुआ. हालांकि उन्होंने कहा कि कप्तानी का दबाव उन्हें परेशान नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा, "भारत की कप्तानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है. दबाव में खेलना और ऐसे दौर से सीखना मुझे आगे बेहतर कप्तान बनाएगा. मैं इस समय इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा कि लोग क्या सोचेंगे, क्योंकि जीत और हार दोनों खेल का हिस्सा हैं."
वॉशिंगटन सुंदर को बाहर करने पर कप्तान ने दी सफाई
अंतिम टी20 में भारत ने टीम संयोजन में दो बदलाव किए. वैभव सूर्यवंशी की जगह संजू सैमसन को मौका दिया गया, जबकि वॉशिंगटन सुंदर की जगह सूर्यांश शेडगे को टीम में शामिल किया गया. इस फैसले पर सवाल पूछे जाने पर अय्यर ने कहा कि टीम नए संयोजन को आजमाना चाहती थी. उन्होंने कहा, "हम सीरीज हार चुके थे, इसलिए सोचा कि इस विकेट पर कौन-सा संयोजन बेहतर रहेगा. वॉशिंगटन प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन हम अलग विकल्प आजमाना चाहते थे." हालांकि यह प्रयोग सफल नहीं रहा. शिवम दुबे और सूर्यांश शेडगे ने मिलकर चार ओवरों में 61 रन खर्च किए.
संजू सैमसन को मौका देने की वजह भी बताई
वैभव सूर्यवंशी को बाहर कर संजू सैमसन को खिलाने के फैसले पर अय्यर ने कहा कि टीम को शीर्ष क्रम में एक अतिरिक्त दाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत महसूस हुई. उन्होंने कहा, "हम ऐसी बल्लेबाजी संयोजन चाहते थे जो इन परिस्थितियों में बेहतर साबित हो. अभिषेक शर्मा के साथ एक दाएं हाथ का बल्लेबाज जरूरी था. संजू एक शानदार बल्लेबाज हैं और उन्होंने भारत को पहले भी कई सीरीज जिताई हैं."
ऑस्ट्रेलिया दौरे की तैयारी पर रहेगा फोकस
श्रेयस अय्यर ने कहा कि इंग्लैंड दौरे की असफलता के बाद अब टीम का पूरा ध्यान विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने पर रहेगा. उन्होंने कहा, "आगे हमें ऑस्ट्रेलिया सहित कई विदेशी दौरों पर जाना है. हमारी कोशिश होगी कि टीम का तालमेल और तैयारी ऐसी हो कि हम किसी भी परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन कर सकें. यही हमारी आगे की योजना है."
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