Mansukh Mandaviya : मंगलवार को खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को कैश प्राइज देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान मनसुख मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रतियोगिता में पोडियम तक पहुंचना सिर्फ सरकारी नौकरी पाने का जरिया नहीं होना चाहिए. पदक विजेताओं को गोल्ड के लिए 30 लाख रुपये, सिल्वर के लिए 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज के लिए 10 लाख रुपये का कैश प्राइज दिया गया.
अगली पीढ़ी का करें मार्गदर्शन
चैंपियन प्लेयर्स को बधाई देते हुए खेल मंत्री ने सभी से आग्रह किया कि वे खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन और प्रेरित करके अपने प्रतिस्पर्धी करियर के बाद भी भारतीय खेलों में अपना योगदान दें. सम्मान समारोह में भारतीय मुक्केबाजी दल के सदस्य भी शामिल हुए जिसने 10 मेडल (सात गोल्ड और तीन सिल्वर) के शानदार प्रदर्शन के साथ मेडल टैली में टॉप प्लेस हासिल किया.
''आइए, सिर्फ सरकारी नौकरी पाने के मकसद से राष्ट्रमंडल खेलों का मेडल नहीं जीते. मैं आप सभी से अपील करता हूं कि अपने सक्रिय करियर से संन्यास के बाद खेल अकादमियां संचालित कीजिए.''उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों जैसी बहु खेल प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर प्लेयर्स को गवर्नमेंट जॉब मिलने के पिछले उदाहरणों का जिक्र किया.
जूडो दल को मिला सम्मान
मांडविया ने जूडो दल को भी सम्मानित किया जिसने चार पदक (दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक सहित) जीतकर इन खेलों में भारत का अब तक का सबसे अच्छा अभियान पूरा किया. ग्लास्गो में भारत ने जूडो की 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसमें अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत के लिए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीता. वहीं बात करें बर्मिंघम में हुए 2022 खेलों की तो भारत ने उसमें कुल तीन पदक जीते थे जिनमें कोई गोल्ड मेडल नहीं था.
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एशियाई खेलों को लेकर मिले टिप्स
जापान में सितंबर-अक्टूबर में होने वाले एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए मांडविया ने खिलाड़ियों से कहा कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में बनी अपनी लय को बरकरार रखें. खेल मंत्री ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि आप सभी इस बढ़े हुए हौसले का इस्तेमाल 2026 के एशियाई खेलों में और स्वर्ण पदक जीतने के लिए करें. जिन लोगों ने रजत और कांस्य पदक जीते हैं, उन्हें स्वर्ण के लिए कोशिश करनी चाहिए और जिन्होंने स्वर्ण जीता है, उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने को कहा.'
नहीं भूले अपने गुरु का मार्गदर्शन
उन्होंने खिलाड़ियों से यह भी कहा कि वे अपने कोच के योगदान को कभी नहीं भूलें. मांडविया ने कहा, 'आप में से किसी को भी अपने कोच के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए. गुरु का मार्गदर्शन जीवन में आपको बहुत आगे ले जाता है.'
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