Bhoomi Pujan: नए घर के निर्माण से पहले भूमि पूजन की परंपरा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है. इस अनुष्ठान के दौरान नींव में चांदी का सर्प और कलश स्थापित करने की प्रथा प्रचलित है. आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व.
भूमि पूजन का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले भूमि पूजन करना मंगलकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे निर्माण कार्य निर्विघ्न पूरा होता है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है. भूमि पूजन के दौरान किए जाने वाले सभी अनुष्ठान आस्था और शुभ संकल्प का प्रतीक माने जाते हैं.
नींव में सर्प स्थापित करने की मान्यता
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा कहते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शेषनाग को पृथ्वी का आधार माना गया है. इसी विश्वास के कारण कई परंपराओं में मकान की नींव में चांदी का सर्प स्थापित किया जाता है. मान्यता है कि इससे घर की नींव मजबूत रहने और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह परंपरा शेषनाग के संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है.
कलश स्थापना का आध्यात्मिक संदेश
भूमि पूजन में स्थापित कलश को भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इसमें दूध, दही, घी, पुष्प और सिक्का अर्पित कर मंगलकामना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि यह अनुष्ठान घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुख-शांति का आह्वान करता है. हालांकि यह परंपरा धार्मिक आस्था और लोकविश्वास पर आधारित है तथा अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि भिन्न हो सकती है.
