Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. साल 2026 में अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हुई है, जिसका समापन 15 जून को होगा. अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. इस अवधि के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. हालांकि, यह समय आध्यात्मिक कार्यों, मंत्र जाप, दान-स्नान और भगवान नारायण की भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, हिंदू कैलेंडर के अन्य सभी 12 महीनों के कोई न कोई स्वामी देवता माने जाते हैं, जैसे सूर्य, चंद्रमा, इंद्र आदि. लेकिन जब सूर्य और चंद्र वर्ष के अंतर को संतुलित करने के लिए इस 13वें महीने यानी अधिकमास की उत्पत्ति हुई, तब इसका कोई स्वामी नहीं था. स्वामी न होने के कारण इस महीने में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते थे. इसी वजह से लोग इसे ‘मलमास’ यानी मलिन महीना कहने लगे और इसकी उपेक्षा होने लगी.
हर ओर से उपेक्षित और अपमानित होने के बाद मलमास अत्यंत दुखी हो गया. अपनी व्यथा लेकर वह भगवान विष्णु के पास पहुंचा और उनसे अपना दुख बताया. उसने कहा, “हे प्रभु! संसार में हर जीव, हर दिन और हर महीने का कोई न कोई आदर करता है, लेकिन मुझे सब अपवित्र मानते हैं. मेरा कोई स्वामी नहीं है, इसलिए मेरा जीवन अंधकारमय हो गया है.”
मलमास की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु का हृदय पिघल गया. उसकी पीड़ा को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने कहा, “आज से मैं इस महीने को अपना नाम देता हूं. संसार में मुझे ‘पुरुषोत्तम’ कहा जाता है, इसलिए आज से यह महीना भी ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से जाना जाएगा. मैं स्वयं इसका स्वामी बनता हूं.”
भगवान विष्णु ने इस महीने को वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति इस पूरे महीने में नियम और संयम का पालन करेगा, भगवान का स्मरण करेगा, दान-पुण्य और दीपदान करेगा, उसे अन्य महीनों की तुलना में करोड़ों गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होगा. इस प्रकार, जिस महीने को कभी अशुभ माना जाता था, वही सभी महीनों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी बन गया.
अधिकमास क्यों आता है?
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अधिकमास का एक वैज्ञानिक आधार भी है.
- चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है.
- सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है.
दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. तीन साल में यह अंतर लगभग 33 दिनों का हो जाता है. इसी अंतर को संतुलित करने के लिए ज्योतिष विज्ञान में हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है.
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