Chaturmas: आज 25 जुलाई, शनिवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, यानी देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का प्रारंभ हो गया है. यह चार महीने आध्यात्मिक साधना, जप-तप और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं. हालांकि, इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों समेत अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, तब इस ब्रह्मांड और सृष्टि का संचालन कौन करता है? आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं इसका जवाब.
भगवान शिव संभालते हैं संसार की बागडोर
शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद सृष्टि के संचालन का संपूर्ण दायित्व भगवान शिव संभालते हैं. मान्यता है कि भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाने से पहले संपूर्ण ब्रह्मांड के संरक्षण और संचालन का भार भगवान शिव को सौंप देते हैं. यही कारण है कि चातुर्मास का पहला महीना सावन भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है. इस दौरान शिवजी की पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
चातुर्मास में क्या नहीं करना चाहिए?
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए.
- तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, शराब और नशे का सेवन नहीं करना चाहिए.
- लहसुन और प्याज का सेवन न करें.
- क्रोध, झूठ, चुगली, अपशब्द और विवाद से बचना चाहिए.
- किसी का अपमान या हिंसा नहीं करनी चाहिए और जीवों पर दया का भाव रखना चाहिए.
- व्रत या संकल्प लेने के बाद उसके नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.
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