सावन सोमवार का पहला व्रत किसने रखा था? जानें इसकी शुरुआत की पौराणिक कथा

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र है. जानें इस पवित्र महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रत की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और इसका संबंध माता पार्वती की तपस्या से कैसे जोड़ा जाता है.

Sawan Somwar Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है. श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन सोमवार व्रत की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से जोड़ा जाता है.

शिव पुराण में मिलता है माता पार्वती की तपस्या का वर्णन

शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या और अखंड भक्ति का मार्ग अपनाया. पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक कठिन तप कर भगवान शिव की आराधना की. उनकी अटूट श्रद्धा और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.

सावन सोमवार व्रत की परंपरा से कैसे जुड़ी यह कथा?

धार्मिक और लोकमान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती की इसी तपस्या को सावन सोमवार और सोलह सोमवार व्रत की परंपरा का आधार माना जाता है. मान्यता है कि उनकी शिवभक्ति से प्रेरित होकर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखना शुरू किया. हालांकि, शिव पुराण में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता कि सावन सोमवार व्रत की शुरुआत सबसे पहले माता पार्वती ने ही की थी.

क्यों रखा जाता है सावन सोमवार का व्रत?

मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं:

  • मनचाहा जीवनसाथी: अविवाहित युवक-युवतियां योग्य और मनभावन जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत रखते हैं.
  • अखंड सौभाग्य: विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन, पति की दीर्घायु और पारिवारिक समृद्धि के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं.

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लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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