Vrishabh Sankranti 2026: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है. सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तब संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. वर्तमान में सूर्य मेष राशि में विराजमान हैं और अब वे शुक्र ग्रह की राशि वृषभ में प्रवेश करने जा रहे हैं. सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश करने के साथ ही वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है.
वृषभ संक्रांति 2026 कब है?
इस वर्ष वृषभ संक्रांति 15 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है. पंचांग के अनुसार सूर्य देव सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर वृषभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस दिन पुण्य काल सुबह 5:30 बजे से शुरू होकर 6:28 बजे तक है. यही समय महा पुण्य काल भी माना गया है. इस 58 मिनट के दौरान स्नान, दान और सूर्य पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
वृषभ संक्रांति पर करें सत्तू और जौ का दान
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सत्तू, जौ और गेहूं का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती. यह दान आर्थिक परेशानियों को दूर करने वाला माना गया है.
सफेद वस्त्र और गर्मी से राहत देने वाली चीजों का दान
वृषभ संक्रांति के दिन सफेद वस्त्र, छाता, चप्पल या पंखा दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है. गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं.
गुड़ और तांबे का दान बढ़ाता है मान-सम्मान
ज्योतिष शास्त्र में गुड़ और तांबा सूर्य से संबंधित वस्तुएं मानी जाती हैं. इनका दान करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और व्यक्ति को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है.
गाय को हरा चारा खिलाना होता है शुभ
वृषभ संक्रांति पर गाय को हरा चारा, रोटी या गुड़ खिलाना भी बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे पितृ दोष कम होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
