Guru Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है. जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो उसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे ज्ञान, सुख और समृद्धि के द्वार खुलते हैं. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से यह व्रत करते हैं.
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में की जाती है. इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:54 बजे से रात 09:02 बजे तक रहेगा. वहीं शाम 07:05 बजे के बाद भगवान शिव की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं.
बिहार, यूपी और झारखंड में विशेष आस्था
बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में गुरु प्रदोष व्रत को लेकर विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है. मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. कई स्थानों पर रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और शिव आरती का आयोजन किया जाता है. श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए उपवास रखकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है. विधिपूर्वक शिव पूजा करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
