Vijaya Ekadashi 2026: आज, 13 फरवरी 2026 को विजया एकादशी है. यह त्योहार भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से हर कार्य में विजय की प्राप्ति होती है. इसलिए हर भक्त को इस दिन भगवान नारायण की पूजा अवश्य करनी चाहिए. पूजा के अंत में आरती करने का विधान है. कहा जाता है कि भक्तिभाव से भगवान विष्णु की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है.
भगवान विष्णु की आरती करने की विधि
आरती सामग्री
- पीतल या मिट्टी का दीपक
- शुद्ध घी
- रुई की बाती या कपूर
- घंटी और शंख
- फूल और जल
आरती करने का तरीका
आरती करते समय दीपक को घुमाने का एक निश्चित क्रम होता है, जिसे शास्त्रों में शुभ माना गया है:
- चरणों की वंदना: सबसे पहले दीपक को भगवान के चरणों की ओर 4 बार घुमाएं.
- नाभि की वंदना: इसके बाद नाभि की ओर 2 बार घुमाएं.
- मुख की वंदना: फिर भगवान के मुखमंडल की ओर 1 बार घुमाएं.
- संपूर्ण आरती: अंत में भगवान के पूरे शरीर के चारों ओर 7 बार दीपक घुमाएं.
आरती के नियम
- खड़े होकर आरती: आरती हमेशा खड़े होकर और सीधे रहकर करनी चाहिए. यदि खड़े होने में असमर्थ हों, तो बैठकर भी कर सकते हैं.
- दोनों हाथों का प्रयोग: आरती की थाली को दोनों हाथों से पकड़ें.
- स्वर: आरती को बहुत तेजी से या अत्यधिक शोर मचाकर न गाएं. भक्ति भाव के साथ मध्यम स्वर में गाएं.
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे.
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का.
सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी.
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी.
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता.
मैं मूर्ख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति.
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे.
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
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