Swati Nakshatra Rain Water Astro Tip: ज्योतिषशास्त्र और आयुर्वेद में 27 नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया गया है. इनमें स्वाती नक्षत्र को बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं धार्मिक और पारंपरिक मान्यता है कि स्वाती नक्षत्र में बरसने वाली बारिश की बूंद अगर शिंपल्यात पडली, तर त्यापासून मोती तयार होतो. इसी वजह से इस नक्षत्र के वर्षाजल को ‘अमृततुल्य’ माना जाता है.
18 अगस्त को फिर मिलेगा खास मौका
जिन लोगों से पिछले महीने स्वाती नक्षत्र के दौरान वर्षाजल संग्रह करने का अवसर छूट गया था, उनके लिए 18 अगस्त 2026 को फिर मौका है. स्वाती नक्षत्र 18 अगस्त की रात 12:30 बजे से शुरू होकर 19 अगस्त की रात 2:16 बजे तक रहेगा.
कैसे करें स्वाती नक्षत्र के जल का संग्रह?
स्वाती नक्षत्र के दौरान बारिश हो तो छत या किसी खुले स्थान पर तांबे, पीतल या कांच का साफ और चौड़ा बर्तन रखें. सीधे आसमान से गिरने वाले पानी को इसमें एकत्र करें. इसे रातभर ढककर सुरक्षित रखें. सुबह पानी को साफ, महीन सूती कपड़े से छानकर कांच की स्वच्छ बोतल या जार में भरकर रखें.
धन-वृद्धि और वास्तुदोष के लिए करें ये उपाय
धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वाती नक्षत्र में एकत्र किए गए वर्षाजल को घर की ईशान दिशा यानी उत्तर-पूर्व कोने में रखना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. वास्तु संबंधी नकारात्मकता दूर करने और धन-समृद्धि के लिए भी इसे उपयोगी माना जाता है. हालांकि, ये उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
