सुइया पहाड़: कांवर यात्रा का सबसे कठिन और खूबसूरत पड़ाव

12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क, मेष, तुला और मकर राशि के जातकों को करियर, यात्रा और आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

बिनीत कुमार (देवघर)

Suiya Pahad: सुल्तानगंज से बाबा वैद्यनाथ धाम, देवघर तक होने वाली विश्व प्रसिद्ध कांवर यात्रा में बांका जिले का सुइया पहाड़ सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में गिना जाता है. यह केवल एक पहाड़ी मार्ग नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम है. श्रावणी मेले के दौरान लाखों कांवरिये इस कठिन चढ़ाई को पार करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह रास्ता भगवान शिव की परीक्षा और आस्था का प्रतीक माना जाता है. चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद यहां की हरियाली और मनमोहक प्राकृतिक दृश्य यात्रियों की थकान को कम कर देते हैं.

करोड़ों वर्ष पुरानी भूवैज्ञानिक धरोहर

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और उपलब्ध भूवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सुइया पहाड़ छोटानागपुर ग्रेनाइट ग्नाइस कॉम्प्लेक्स (Chotanagpur Granite Gneiss Complex) का हिस्सा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की चट्टानों का निर्माण प्रोटेरोजोइक काल में हुआ था, जिसकी अनुमानित आयु 90 से 160 करोड़ वर्ष (900–1600 मिलियन वर्ष) मानी जाती है. हालांकि केवल सुइया पहाड़ की सटीक आयु निर्धारित करने वाला अलग अध्ययन उपलब्ध नहीं है, लेकिन पूरे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना इसे भारत की प्राचीन प्राकृतिक धरोहरों में शामिल करती है.

इतिहास के पन्नों में दर्ज पहचान

इतिहासकारों के अनुसार सुल्तानगंज-देवघर कांवर मार्ग का उल्लेख मध्यकालीन यात्रा विवरणों और ब्रिटिश काल के बंगाल डिस्ट्रिक्ट गजेटियर तथा संताल परगना गजेटियर में मिलता है. प्रसिद्ध सर्वेक्षक फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन के यात्रा विवरणों में भी इस क्षेत्र के पहाड़ी और वन मार्ग का जिक्र मिलता है. इससे स्पष्ट होता है कि सुइया क्षेत्र कई सौ वर्षों से तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. स्थानीय लोकमान्यताएं इसकी धार्मिक परंपरा को इससे भी अधिक प्राचीन मानती हैं.

आस्था के साथ प्रकृति का अनुपम सौंदर्य

समुद्र तल से अपेक्षाकृत ऊंचाई पर स्थित सुइया पहाड़ घने जंगलों और हरियाली से घिरा हुआ है. श्रावणी मेले के दौरान यहां 'बोल बम' के जयघोष से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठता है. प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती करता है. यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.


ये भी देखें: बाबा बैद्यनाथ धाम: आस्था से आगे रोजगार, पर्यटन और जनसेवा का मजबूत केंद्र बना देवघर


संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि सुइया पहाड़ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बिहार की महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत भी है. अनियंत्रित कटाव, अतिक्रमण और पर्यावरणीय दबाव भविष्य में इसकी प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए वैज्ञानिक अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर और इसकी आध्यात्मिक विरासत का अनुभव कर सकें.

यह क्षेत्र छोटानागपुर ग्रेनाइट ग्नाइस कॉम्प्लेक्स का हिस्सा

बांका जिले का सुइया पहाड़ सुल्तानगंज से बाबा वैद्यनाथ धाम, देवघर तक होने वाली विश्व प्रसिद्ध कांवर यात्रा का सबसे कठिन और मनोहारी पड़ाव माना जाता है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार यह क्षेत्र छोटानागपुर ग्रेनाइट ग्नाइस कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है, जिसकी चट्टानें लगभग 90 से 160 करोड़ वर्ष पुरानी मानी जाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र बिहार की महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है, जिसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >