Shukra Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस वर्ष पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जबकि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना का श्रेष्ठ अवसर है. ऐसे में इस दिन शिव और विष्णु दोनों की पूजा करने से भक्तों को विशेष पुण्यफल और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है.
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को शाम 7:36 बजे से प्रारंभ होकर 13 जून को शाम 4:07 बजे तक रहेगी.
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 7:36 बजे से रात 9:20 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से 12:49 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:40 बजे से 3:36 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:18 बजे से 7:38 बजे तक
पूजा और शुभ मुहूर्त
मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
पुरुषोत्तम मास में दान का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अधिकमास में किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन निम्न कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं:
- अन्न और वस्त्र का दान करना
- जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना
- गौसेवा और गौ-भोजन कराना
- पक्षियों के लिए दाना और जल की व्यवस्था करना
- फल और खाद्य सामग्री का दान देना
ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की कृपा बनी रहती है.
शुक्र प्रदोष व्रत के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
- शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन आवश्यक माना गया है.
- तामसिक भोजन से बचें – मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन न करें.
- क्रोध और विवाद से दूर रहें – कटु वचन और झगड़े से बचें.
- नकारात्मक विचार न रखें – ईर्ष्या और द्वेष से दूरी बनाए रखें.
- व्रत के नियमों का पालन करें – श्रद्धा और संयम के साथ व्रत करें.
- प्रदोष काल में ही शिव पूजा करें – पूजा में अनावश्यक विलंब न करें.
- असत्य भाषण से बचें – सत्य और सदाचार का पालन करें.
- दान-पुण्य की उपेक्षा न करें – सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों की सहायता अवश्य करें.
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का पालन करने से शुक्र प्रदोष व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा भक्तों पर बनी रहती है.
