Shravani Mela 2026: राजकीय श्रावणी मेला 2026 के पहले दिन देवघर में श्रद्धालुओं को एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव मिला. जिला प्रशासन की ओर से शिवलोक परिसर में आयोजित भव्य ड्रोन शो ने बाबा बैद्यनाथ की महिमा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत कर दिया. इसके साथ ही बाबा मंदिर में लागू नई कतार व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कम समय में जलार्पण करने का अवसर मिला. पहले ही दिन कुल 74,987 श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की.
ड्रोन शो में सजी बाबा बैद्यनाथ की दिव्य झांकी
गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे जैसे ही सैकड़ों ड्रोन एक साथ आसमान में उड़े, पूरा शिवलोक परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठा. लगभग 20 से 25 मिनट तक चले इस विशेष शो में रंग-बिरंगी रोशनी के जरिए बाबा बैद्यनाथ मंदिर, द्वादश ज्योतिर्लिंग, श्रावणी मेले की परंपरा और देवघर के धार्मिक इतिहास को आकर्षक डिजिटल आकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. यह दृश्य करीब पांच किलोमीटर के दायरे तक दिखाई दिया, जिसे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ देखा.
श्रद्धालुओं को मिला आधुनिक और आध्यात्मिक अनुभव
जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षित जलार्पण सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को देवघर प्रवास के दौरान यादगार अनुभव देना भी है. उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से धार्मिक विरासत को प्रस्तुत करने का प्रयास श्रद्धालुओं को नई अनुभूति देता है. इस आयोजन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की भी उपस्थिति रही और श्रद्धालुओं ने इसे श्रावणी मेले का आकर्षण बताया.
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नई कतार व्यवस्था से आसान हुआ जलार्पण
इस वर्ष बाबा मंदिर में आम कतार और कूपन कतार को अलग-अलग संचालित किया गया है. नई व्यवस्था के कारण आम कतार से आने वाले श्रद्धालु लगभग 20 से 25 मिनट में मुख्य अरघा तक पहुंचकर जलार्पण कर रहे हैं, जबकि कूपनधारियों को मात्र 7 से 10 मिनट में दर्शन और जलार्पण का अवसर मिल रहा है. वरिष्ठ नागरिकों के लिए बाह्य अरघा की विशेष व्यवस्था भी राहतभरी साबित हुई. श्रद्धालुओं ने इस बदलाव की खुलकर सराहना की.
प्रशासनिक नवाचार और आस्था का सफल समन्वय
श्रावणी मेला 2026 में आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक सुगम बनाया है. ड्रोन शो ने धार्मिक इतिहास को नए रूप में प्रस्तुत किया, जबकि नई कतार व्यवस्था ने जलार्पण प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाया. पहले ही दिन लगभग 75 हजार श्रद्धालुओं का सफल जलार्पण यह दर्शाता है कि प्रशासन आस्था और सुविधाओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में सफल रहा है.
