Shravani Mela 2026: झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार मंगलवार को अपने पूरे परिवार के साथ विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचे. मंदिर पहुंचने पर उन्होंने अपने पुश्तैनी पुरोहित से संकल्प कराया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच फिलपाया से गर्भगृह में प्रवेश किया. पांच वैदिक पंडितों के मंत्रोच्चार के साथ उन्होंने बाबा भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्होंने मां पार्वती, मां काली, मां बगलामुखी और लक्ष्मी-नारायण मंदिर में भी दर्शन-पूजन कर राज्य की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की.
श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं पर जताया संतोष
पूजा के बाद बाबा मंदिर नियंत्रण कक्ष में उपायुक्त सौरभ भुवनिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने मुख्य सचिव को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया. मीडिया से बातचीत में अविनाश कुमार ने कहा कि श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं का वास्तविक आकलन धरातल पर दिखाई दे रही तैयारियों से होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन की सतत मेहनत और श्रद्धालुओं के सहयोग का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है. सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि बाबा धाम आने वाले श्रद्धालुओं, दुकानदारों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए. प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान सुनिश्चित करना होगा.
बांग्ला सावन और भीड़ प्रबंधन पर क्या बोले मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की शुरुआत में कुछ चुनौतियां सामने आती हैं, लेकिन समय के साथ व्यवस्थाओं में लगातार सुधार होता है. बांग्ला सावन के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. वर्षभर बाबा मंदिर में होने वाली भीड़ के स्थायी प्रबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विषय मंदिर प्रबंधन बोर्ड के सामूहिक निर्णय से जुड़ा है और उसी के बाद इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
'बाबा धाम में गूंजे सिर्फ शिवधुन'
अविनाश कुमार ने उपायुक्त से अनुरोध किया कि बाबा मंदिर के आसपास आने वाले लोगों से अनावश्यक रूप से वाहनों का हॉर्न नहीं बजाने की अपील की जाए. उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जब मंदिर परिसर में पहुंचें तो वे शिवधुन और आध्यात्मिक वातावरण का शांतिपूर्वक अनुभव कर सकें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि जनसहयोग से बाबा नगरी को अधिक शांत, स्वच्छ और आध्यात्मिक बनाने का प्रयास है. यदि लोग स्वयं इस आदत को अपनाएं तो बाबा धाम का धार्मिक वातावरण और अधिक दिव्य बन सकता है.
संजीव कुमार मिश्रा (संवाददाता, देवघर) की रिर्पोट
