Shravan Purnima Daan 2026: हिंदू धर्म में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. सावन मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को स्नान, दान, पूजा-पाठ और भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है. वर्ष 2026 में श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन 28 अगस्त को पड़ रहे हैं. इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी है, हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं कि ज्योतिषीय मान्यताओं में इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं का दान और मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है.
सफेद वस्तुओं का करें दान
सावन पूर्णिमा पर चावल, दूध, दही, सफेद वस्त्र या अन्य सफेद वस्तुओं का सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सफेद वस्तुओं का संबंध चंद्र और शुक्र ग्रह से माना जाता है. जरूरतमंद व्यक्ति को दान करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है.
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जरूरतमंदों को पानी का दान
श्रावण पूर्णिमा के दिन प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना या सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार जल दान से चंद्रमा से जुड़े सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने में मदद मिल सकती है और मन को शांति मिलती है.
धन और वस्त्रों का करें दान
यदि सामर्थ्य हो तो जरूरतमंद लोगों को धन, भोजन और वस्त्रों का दान करें. सावन पूर्णिमा पर सेवा और सहायता को विशेष पुण्यकारी माना जाता है. मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और भाग्योदय के अवसर बनते हैं.
भगवान शिव के सामने जलाएं दीपक
सावन पूर्णिमा पर घर के पूजा स्थान में भगवान शिव के चित्र या शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं. इसके बाद श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करें. पंडित कल्कि राम के अनुसार, ‘ॐ जूं सः ॐ जूं सः’ मंत्र का जाप आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए किया जाता है. मंत्र जाप की संख्या और विधि के लिए योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा.
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ग्रहण को लेकर क्या ध्यान रखें?
28 अगस्त 2026 का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए ग्रहण से जुड़े नियमों और सूतक को लेकर स्थानीय पंचांग तथा अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर है.
नोट: ऊपर बताए गए दान और उपाय धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें आस्था के रूप में ही लें.
